

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस राजाशेखर मंथा और जस्टिस राई चट्टोपाध्याय ने पति को मिली उम्र कैद की सजा को बहाल रखा है। उसके खिलाफ पत्नी की हत्या करने का आरोप था। हावड़ा के एडिशनल सेशन जज ने उसे 2017 में उम्र कैद की सजा सुनायी थी। डिविजन बेंच ने उसकी तरफ से दायर अपील को खारिज कर दिया है।
एडवोकेट अमृता पांडे ने बताया कि नाबालिग बच्चे की गवाही इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई थी। उसने खिड़की से अपने पिता को मां की हत्या करते हुए देखा था। डिविजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि एडिशनल सेशन जज की सुनायी गई सजा में दखल देने का कोई कारण नहीं है। पीड़िता शंपा इस कांड के समय 18 सप्ताह की गर्भवती थी। यह सच है कि उसके विसेरा में थोड़ा अल्कोहल मिला था और वह हो सकता है थोड़े नशे में थी। इतने भर से पति को अपनी पत्नी पर साबल से हमला करने का अधिकार नहीं मिल जाता है। पति को पता था कि वह गर्भवती है। अभियुक्त ने इस तरह दो लोगों की हत्या की थी। साबल से हमला करने के बाद ही वह थमा नहीं बल्कि उसके गले में नायलन की रस्सी बांध कर उसकी लाश को घसीटता रहा। वह रस्से से अपनी पत्नी को काफी दूर तक खींचता रहा ताकि गले में फंदा लगने से उसकी मौत हो जाए। डिविजन बेंच ने कहा है कि पूरे मामले पर गौर करने के बाद यह साफ हो जाता है कि अभियुक्त ने बहुत सोच समझ कर अपनी पत्नी की हत्या की थी। यह घटना किसी उत्तेजना के कारण नहीं घटी थी। पूरी घटनाक्रम से साफ है कि इस हत्या को अंजाम देने में करीब 20 से 30 मिनट का समय लगा था। सेशन जज ने उसे आईीपीसी की धारा 302 के तहत उपयुक्त सजा सुनायी है।