

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : रूबी के पास स्थित यह गैराज आज भले ही बहुत खास न दिखता हो, लेकिन यहीं से एक दिलचस्प सफर की शुरुआत हुई थी। साल 2019 में, दो कॉलेज छात्रों के पास इमारत की पहली मंजिल का ऑफिस लेने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। उन्होंने मकान मालकिन को मनाकर उनकी खुली पार्किंग की जगह के चारों ओर चार दीवारें बनवाईं। यही जगह बाद में Drivers4Me का पहला ऑफिस बनी—कोलकाता की वह स्टार्टअप कंपनी, जो लोगों को अपनी कार चलाने के लिए प्रोफेशनल ड्राइवर बुक करने की सुविधा देती है।
सोमवार को कंपनी उसी गैराज में गणेश चतुर्थी मनाने के लिए वापस लौटी। पश्चिम बंगाल सरकार के कैबिनेट मंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा कृषि विपणन विभाग के प्रभारी मंत्री श्री दिलीप घोष ने पूजा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कंपनी के कर्मचारी, निवेशक और शुरुआती दौर से जुड़े समर्थक भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के लिए इसी जगह को चुनना पूरी तरह सोच-समझकर लिया गया फैसला था। उन शुरुआती दिनों के बाद Drivers4Me काफी आगे बढ़ चुकी है। कंपनी अब 7 ऑफिस से काम करती है और उसका कहना है कि उसने 7 शहरों में 52,000 से अधिक रजिस्टर्ड ड्राइवरों के नेटवर्क के जरिए 8 लाख से ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं दी हैं। इनमें कोलकाता, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर शामिल हैं। कंपनी के ऐप्स को 7 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।
व्यक्तिगत ग्राहकों के अलावा, Drivers4Me 260 से ज्यादा कॉरपोरेट क्लाइंट्स के साथ भी काम करती है, जिनमें कार डीलरशिप और फ्लीट ऑपरेटर शामिल हैं। इसी साल की शुरुआत में कंपनी ने अपने ग्राहक और ड्राइवर ऐप्स के नए और बेहतर संस्करण लॉन्च किए तथा इन-हाउस सपोर्ट टीम भी स्थापित की। इन तमाम उपलब्धियों के बावजूद वह गैराज आज भी कंपनी के काम का हिस्सा है। यह अभी भी एक सक्रिय ऑफिस है—कंपनी के सात ऑफिसों में से एक।
कंपनी के संस्थापक राजर्षि नाग, 28, और परमर्थ साहा, 29, ने यह व्यवसाय तब शुरू किया था जब वे खुद कॉलेज में पढ़ रहे थे। दोनों किसी कारोबारी परिवार से नहीं आते थे और उन्होंने कई मौकों पर बताया है कि इसी गैराज ने उन्हें कारोबार चलाने की शुरुआती सीख दी।
कंपनी के CTO साहा ने इसे बेहद सरल शब्दों में कहा, “हमारी यात्रा हमेशा कुछ नया शून्य से खड़ा करने की रही है। जिस जगह से सब कुछ शुरू हुआ, वहीं गणेश चतुर्थी मनाना हमें अपनी जड़ों और उन मूल्यों की याद दिलाता है, जिनके साथ हमने शुरुआत की थी।”
पूजा के बाद टीम ने वहीं प्रसाद ग्रहण किया और हमेशा की तरह त्योहार की महफिल में बातचीत और हंसी-मजाक का दौर चला। उसी कमरे में, जहां कभी दो संस्थापक और एक विचार हुआ करते थे, आज पूरी टीम मौजूद थी—और वह जगह इस बात की याद दिला रही थी कि यह कहानी कितनी दूर तक पहुंच चुकी है।