अंगदान से चार मरीजों को मिली जिंदगी की नई उम्मीद

ग्रीन कॉरिडोर बनाकर 10 मिनट में एयरपोर्ट पहुंचाए गए फेफड़े, 7 मिनट में कमांड अस्पताल पहुंची किडनी
सांकेतिक चित्र
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मधुर, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : 58 वर्षीय ब्रेन-डेड मरीज के परिजनों के साहसिक और मानवीय निर्णय से कई जरूरतमंद मरीजों को जीवन की नई उम्मीद मिली। फोर्टिस अस्पताल मैं इलाजरत नदिया जिला के कल्याणी उपनगर के निवासी सोमेन दासगुप्ता के अंगदान के बाद उनके दोनों गुर्दे, फेफड़े और कॉर्निया जरूरतमंद मरीजों के प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध कराए गए।

सोमेन दासगुप्ता को गंभीर मस्तिष्क रक्तस्राव के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत उन्हें ब्रेन-डेड घोषित किया गया। इसके बाद परिवार ने उनके अंगों का दान करने की सहमति दी। परिवार के इस निर्णय से कई मरीजों को नया जीवन मिलने की राह खुली।

अंगदान की प्रक्रिया के तहत क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन और राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन के साथ समन्वय कर अंगों का आवंटन किया गया। मृतक का हृदय भी प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध कराया गया था, लेकिन उपयुक्त प्राप्तकर्ता नहीं मिलने के कारण उसका प्रत्यारोपण नहीं हो सका।

अलग-अलग शहरों में पहुंचे अंग

मृतक की एक किडनी फोर्टिस अस्पताल, आनंदपुर में 39 वर्षीय महिला मरीज को प्रत्यारोपित किए जाने के लिए आवंटित की गई, जबकि दूसरी किडनी कमांड अस्पताल में 30 वर्षीय महिला मरीज के लिए भेजी गई। दोनों फेफड़े गुरुग्राम स्थित आर्टेमिस अस्पताल मैं इलाजरत 61 वर्षीय महिला मरीज के उपचार के लिए गुरुग्राम को आवंटित किए गए। वहीं कॉर्निया बैरकपुर स्थित दिशा आई हॉस्पिटल्स, को सौंपे गए, जिससे जरूरतमंद मरीजों की आंखों की रोशनी लौटाने में मदद मिल सके।

अंगों को समय पर गंतव्य तक पहुंचाने के लिए कोलकाता में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। फोर्टिस अस्पताल, आनंदपुर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक बनाए गए कॉरिडोर के जरिए करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय कर फेफड़ों को महज 10 मिनट में एयरपोर्ट पहुंचाया गया। यह मार्ग रूबी, साइंस सिटी और सेक्टर-5 से होकर गुजरा। वहीं फोर्टिस अस्पताल से कमांड अस्पताल, अलीपुर तक किडनी को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से मात्र 7 मिनट में पहुंचाया गया।

मृतक के बेटे डॉ. सौम्यदीप दासगुप्ता, जो एम्स कल्याणी में पूर्व जूनियर रेजिडेंट रह चुके हैं और वर्तमान में उच्च चिकित्सा शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं, ने कहा कि पिता को खोने का दुख कभी खत्म नहीं हो सकता, लेकिन उनके अंतिम कार्य से दूसरे लोगों को जीवन का दूसरा मौका मिलना परिवार को इस कठिन समय में कुछ सांत्वना देता है। उन्होंने कहा कि उनके पिता हमेशा जरूरतमंदों की मदद करने में विश्वास रखते थे और एक बेटे तथा डॉक्टर के रूप में अंगदान को उन्होंने अपने पिता के मूल्यों को सम्मान देने का सबसे सार्थक तरीका माना।

फोर्टिस हेल्थकेयर की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, चीफ ऑफ स्ट्रैटेजी, ग्रुप हेड-ईसीजी और बिजनेस हेड-जयपुर एवं कोलकाता रिचा एस. देबगुप्ता ने कहा कि अंगदान मानवता और करुणा का सबसे गहरा उदाहरण है।

गौरतलब है कि इस साल अब तक राज्य मैं सात अंगदान किए जा चुके हैं। जबकि बीते एक सप्ताह मैं यह तीसरा अंगदान था। पिछले साल राज्य मैं 14 अंगदान किए गए थे। जबकि सबसे अधिक अंगदान वर्ष 2023 मैं रजिस्टर किए गए थे। इस दौरान राज्य मैं 16 अंगदान किए गए थे।

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