

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा में शुक्रवार को शहरी विकास विभाग पर हुई चर्चा केवल नगर प्रशासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि राज्य की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों की भी झलक दिखा गई। पूर्व नगर विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने भाजपा सरकार की नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल की कार्यशैली की खुलकर सराहना कर सदन का ध्यान खींच लिया। यह दूसरी बार है जब उन्होंने सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बाद भाजपा सरकार के किसी मंत्री की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की है।
फिरहाद ने स्वीकार किया कि मंत्री बनने के बाद महज ढाई महीने में अग्निमित्रा जिस सक्रियता से लगातार विभिन्न इलाकों का दौरा कर रही हैं, वैसा वह अपने कार्यकाल में नहीं कर सके। उन्होंने अवैध रूप से जलाशयों को भरने पर सख्ती बरतने की सलाह देते हुए कहा कि पुलिस के सहयोग से इस पर प्रभावी रोक लगाई जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि शुभेंदु अधिकारी और अग्निमित्रा पाल के नेतृत्व में कोलकाता बेहतर बनता है, तो उन्हें उस पर गर्व होगा।
हालांकि, इस प्रशंसा का जवाब अग्निमित्रा ने राजनीतिक अंदाज में दिया। उन्होंने कहा कि जब पूर्व मंत्री स्वयं उनकी सक्रियता स्वीकार कर रहे हैं, तो यह भी बताना चाहिए कि तृणमूल के 15 वर्षों के शासनकाल में जलजमाव, निकासी और शहरी अव्यवस्था जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो सका। उन्होंने योजनाओं पर खर्च हुए धन का हिसाब भी मांगा और कहा कि वर्तमान सरकार में बजट आवंटन किसी राजनीतिक प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार किया जाएगा।
सदन में हुई यह नोकझोंक केवल प्रशंसा और पलटवार तक सीमित नहीं रही। फिरहाद ने वाममोर्चा और कांग्रेस का उल्लेख करते हुए सत्ता की अस्थायी प्रकृति पर टिप्पणी की, जबकि भाजपा विधायकों ने अगले 50 वर्षों तक सत्ता में बने रहने का दावा किया। इससे सदन में राजनीतिक तकरार भी देखने को मिली। पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि बंगाल की राजनीति में अब मुद्दों पर तीखे हमलों के साथ-साथ राजनीतिक परिपक्वता और प्रतिद्वंद्वी की कार्यशैली की सार्वजनिक सराहना जैसे नए संकेत भी उभर रहे हैं।