30 दिन में फायर सर्टिफिकेट, दो हफ्ते में जांच, फायर लाइसेंस व्यवस्था में सख्ती

आग से सुरक्षा के लिए नई एसओपी तैयार कर रहा दमकल विभाग
सांकेतिक चित्र
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित शिखा इन में आग लगने से नौ लोगों की मौत के बाद दमकल विभाग ने अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभाग एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार कर रहा है। साथ ही, कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे दमकल विभाग में किन पदों पर तत्काल भर्ती जरूरी है, इसकी सूची भी तैयार की जा रही है।

सात सदस्यीय समन्वय समिति बनेगी

प्रशासनिक स्तर पर कोलकाता पुलिस और कोलकाता नगर निगम समेत सात सदस्यों की एक समन्वय समिति गठित करने का फैसला किया गया है। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि किसी संभावित अग्निकांड या अन्य आपदा से निपटने के लिए जरूरी सभी उपाय किए जा रहे हैं या नहीं। जरूरत पड़ने पर समिति संबंधित विभागों को सुझाव भी देगी।

हर संस्थान में फायर ड्रिल अनिवार्य

प्रस्तावित एसओपी में सभी संस्थानों के लिए न्यूनतम अग्निशमन व्यवस्था अनिवार्य करने का निर्देश होगा। इसके तहत नियमित फायर ड्रिल कराना जरूरी होगा। कर्मचारियों को आग बुझाने का प्रशिक्षण देना अनिवार्य होगा। प्रवेश और निकास के मुख्य रास्ते पर बिल्डिंग का नक्शा प्रमुखता से लगाना होगा। गोदाम और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक होगी। इसके साथ ही दमकल और पुलिस के संपर्क नंबर बड़े अक्षरों में ऐसी जगह लिखने होंगे, जहां आपात स्थिति में वे आसानी से दिखाई दें।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में औचक निरीक्षण

सूत्रों के अनुसार दमकल अधिकारी अब घनी आबादी वाले और संवेदनशील इलाकों में औचक निरीक्षण करेंगे। ऐसे इलाकों में मौजूद गोदाम, बाजार, कारखाने, शॉपिंग मॉल और बहुमंजिला इमारतों का हर छह महीने में फायर ऑडिट अनिवार्य होगा। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गंभीर लापरवाही मिलने पर संबंधित संस्थान को कारोबार जारी रखने की अनुमति खारिज भी की जा सकती है।

फायर स्टेशन को तुरंत मिलेगी आग की सूचना

सूत्रों के अनुसार एसओपी में शॉपिंग मॉल, बहुमंजिला इमारतों और सरकारी कार्यालयों में जीपीएस आधारित सिस्टम लगाने का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिसका उद्देश्य किसी इमारत में आग लगते ही निकटतम फायर स्टेशन को घटना की जानकारी मिल सके। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों की मदद ली जाएगी। नई व्यवस्था के तहत 30 दिनों के भीतर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करना होगा। यदि किसी आवेदन को खारिज किया जाता है तो उसका कारण स्पष्ट रूप से दर्ज करना अनिवार्य होगा। वहीं, आवेदन मिलने के बाद दो सप्ताह के भीतर संबंधित संस्थान का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना होगा कि उसने सभी अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन किया है। इसके बाद ही फायर लाइसेंस जारी किया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार बिना मौके पर जांच किए फायर लाइसेंस जारी करना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आधुनिक उपकरणों से मजबूत होगा दमकल विभाग

बढ़ती बहुमंजिला इमारतों की संख्या को देखते हुए दमकल विभाग आधुनिक उपकरणों की खरीद करेगा। इनमें अधिक ऊंचाई तक पहुंचने वाली आधुनिक फायर लैडर समेत अन्य अत्याधुनिक संसाधन शामिल होंगे। प्रशासन का मानना है कि केवल कारोबार को अनुमति देना पर्याप्त नहीं है। कारोबार करने वालों की सुरक्षा के प्रति जवाबदेही तय करना और नियमों का सख्ती से पालन कराना भी उतना ही जरूरी है।

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