

कोलकाता : कसबा क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर ने एक बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी का मामला उजागर किया है, जिसमें उन्होंने अनिर्बान घोष नामक व्यक्ति और उसके साथियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। डॉक्टर का आरोप है कि घोष ने खुद को एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में प्रस्तुत कर उनसे लगभग 25 करोड़ की ठगी की। यह ठगी पिछले 13 वर्षों से चल रही थी। यह मामला तब सामने आया जब इस साल की शुरुआत में घोष ने डॉक्टर को डराने-धमकाने की कोशिश की और कहा कि उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए भारी जुर्माना देना होगा। इसी के बाद डॉक्टर को शक हुआ और उन्होंने मामले की जांच करवाई।
क्या है पूरा मामला
शिकायत के अनुसार, यह धोखाधड़ी वर्ष 2013 से शुरू हुई, जब घोष ने अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क किया और खुद को जीवन दीप शाखा का वरिष्ठ बैंक अधिकारी बताया। उसने डॉक्टर को कई जीवन बीमा पॉलिसियों में निवेश के लिए राजी किया। समय के साथ डॉक्टर ने कुल 15 बीमा पॉलिसियों में निवेश किया, जिनमें से कई लेन-देन नकद में किए गए और उनकी कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी गई। साल 2015 में मामला और गंभीर हो गया, जब घोष ने डॉक्टर की मुलाकात अरुण भट्टाचार्य से करवाई, जो खुद को बैंक के पूर्वी क्षेत्र का मुख्य महा प्रबंधक बताता था। इन दोनों ने डॉक्टर को कई उच्च-मूल्य वाले वित्तीय निवेशों जैसे लोन फोरक्लोजर, प्रॉपर्टी खरीद और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का लालच दिया। इसके नाम पर डॉक्टर से करीब 25 करोड़ की धनराशि नकद और बैंक ट्रांसफर के जरिए वसूली गई। डॉक्टर को तब शक हुआ जब 31 जनवरी को उन्हें क्रिप्टोकरेंसी फंड निकासी से जुड़ा एक पत्र सौंपा गया, जिसमें दावा किया गया था कि उनके बिटकॉइन और एथेरियम में 1.30 मिलियन डॉलर से अधिक के निवेश हैं। पत्र में फंड निकालने के लिए 20 लाख रुपये टैक्स भुगतान की मांग की गई, जिसे डॉक्टर ने घोष को दे भी दिया।
बाद में डॉक्टर ने दस्तावेजों की जांच कराई और कई गड़बड़ियां पाईं। जिस कथित आरबीआई पत्र में निवेश का उल्लेख था, उसमें टाइपोग्राफिक त्रुटियां और फॉर्मेटिंग गलतियां थीं, जो किसी आधिकारिक दस्तावेज में नहीं होतीं। साथ ही, डॉक्टर ने कभी क्रिप्टो में निवेश की अनुमति नहीं दी थी और ना ही उन्हें इसकी कोई जानकारी दी गई थी। डॉक्टर की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपित की तलाश जारी है।