

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
बहरमपुर : मुर्शिदाबाद जिले का बेलडांगा विधानसभा क्षेत्र आगामी बिधानसभा चुनाव में एक राजनीतिक प्रयोगशाला बन चुका है, जहां भावनात्मक मुद्दों की तुलना में प्रशासनिक हस्तक्षेप खासतौर पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अधिक निर्णायक बनकर उभरा है।
सीमांकन और सामाजिक संरचना का प्रभाव
इस मुद्दे पर निर्वाचन क्षेत्र की प्रकृति को समझना यहां बेहद जरूरी है। परिसीमन आयोग के आदेश के अनुसार, बेलडांगा एक स्पष्ट अल्पसंख्यक बहुल सीट है, जिसमें बेलडांगा नगरपालिका के साथ बेलडांगा-I ब्लॉक के भाबता-I, भाबता-II, देवकुंडू, मिर्जापुर-II, महुला-I और सुजापुर कुमारपुर ग्राम पंचायत तथा बहरमपुर ब्लॉक के भाकुड़ी-II, हरिदासमती, नाओदा, पानुर, राजधरपाड़ा और रंगामाटी चांदपाड़ा शामिल हैं। इस सामाजिक-सांख्यिकीय संरचना के कारण यहां चुनावी रुझान पारंपरिक रूप से संगठित वोट बैंक और बूथ प्रबंधन पर निर्भर रहे हैं। यही कारण है कि SIR का प्रभाव इस बार असाधारण रूप से गहरा है।
2021 का जनादेश और बदला हुआ परिदृश्य
वर्ष 2021 में तृणमूल कांग्रेस के हसनुज्जमां शेख ने 55% से अधिक वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी। भाजपा दूसरे स्थान पर रही, जबकि कांग्रेस का आधार तेजी से खिसका। यह परिणाम दर्शाता था कि अल्पसंख्यक समेकन और संगठनात्मक मजबूती निर्णायक थे लेकिन 2026 में उम्मीदवारों का परिदृश्य बदल गया है। टीएमसी ने अपने पुराने वफादार नेता रबीउल आलम चौधरी को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने भारत कुमार झंवर, कांग्रेस ने मुहम्मद साहरउद्दीन शेख और आरएसपी के राजेश घोष जैसे नये उभरते चेहरे मैदान में हैं। खासकर जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के शोएब अहमद कबीर की मौजूदगी मुकाबले को बहुकोणीय बना रही है।
SIR बनाम ‘बाबरी मस्जिद’ नैरेटिव
चुनावी बहस में हुमायूं कबीर द्वारा पिछले दिसंबर में उठाया गया “बाबरी मस्जिद” निर्माण का मुद्दा सुर्खियों में जरूर है, लेकिन इसका प्रभाव बेलडांगा में सीमित दिखाई देता है। इसके उलट SIR के कारण मतदाता सूची में संशोधन जिसमें नामों का हटना, जुड़ना और सत्यापन शामिल है, ने वास्तविक चुनावी गणित को बदल दिया है। बेलडांगा में SIR के तहत स्थिति बेहद संवेदनशील है। चुनाव आयोग की अंतिम रिपोर्ट में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बेलडांगा में कुल 19,867 मतदाताओं में से 19,334 पर कार्रवाई की गई। इनमें से 12,874 मतदाता योग्य पाए गए, जबकि 6,460 मतदाता अयोग्य पाए गए। स्थानीय स्तर पर यह देखा जा रहा है कि जिन पंचायतों में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं, वहां पार्टियों को अपनी रणनीति नए सिरे से बनानी पड़ी है। यह बदलाव खासकर अल्पसंख्यक बहुल बूथों में निर्णायक हो सकता है, जहां पारंपरिक “ब्लॉक वोटिंग” का पैटर्न प्रभावित हुआ है।
स्टिंग ऑपरेशन को लेकर विवाद
इस बीच चुनावी माहौल में टीएमसी के ‘स्टिंग ऑपरेशन’ में हुमायूं पर भाजपा से धन मांगने और समर्थन देने की बात सामने आई। उस विवादित वीडियो में उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी और बाबरी मस्जिद पर भी विवादित टिप्पणी की। इसके बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने उनसे संबंध तोड़ लिया। उनकी पार्टी के कई सदस्यों और उम्मीदवारों ने पार्टी छोड़ दी, जिससे वे मुश्किल में पड़ गए। हालांकि हुमायूं ने हाल ही में इस संबंध में उच्च न्यायालय में एक मामला दायर किया है फिर भी इस घटना से बेलडांगा में चुनाव पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।
भावनात्मक बनाम संरचनात्मक राजनीति
बेलडांगा में 2026 का चुनाव मूलतः दो परतों में लड़ा जा रहा है जिनमें एक प्रतीकात्मक और भावनात्मक मुद्दों की राजनीति और दूसरा, मतदाता सूची और बूथ संरचना का ठोस गणित शामिल है। अब तक के संकेत स्पष्ट करते हैं कि जहां “बाबरी मस्जिद” का मुद्दा राजनीतिक ध्रुवीकरण का औजार है, वहीं SIR वह कारक बन गया है जो चुपचाप लेकिन निर्णायक रूप से चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। मुर्शिदाबाद की इस सीट पर अंततः जीत उसी की होगी, जो नैरेटिव नहीं, बल्कि बदले हुए मतदाता गणित को बेहतर समझेगा।