

कोलकाता : शहर में ऊंची इमारतों के निर्माण कार्यों पर लगी रोक हटाने की मांग को लेकर रियल एस्टेट उद्योग ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उद्योग संगठनों का कहना है कि सुरक्षा ऑडिट की प्रक्रिया जारी रखते हुए भी निर्माण स्थलों पर नियंत्रित और नियामकीय निगरानी के तहत काम दोबारा शुरू कराया जा सकता है।
रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रतिनिधियों का तर्क है कि निर्माण गतिविधियों पर लंबे समय तक रोक से परियोजनाओं की लागत लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही हजारों श्रमिकों, ठेकेदारों और निर्माण सामग्री से जुड़े कारोबार पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
उनका कहना है कि सुरक्षा मानकों से किसी प्रकार का समझौता किए बिना ऑडिट और निर्माण कार्य समानांतर रूप से संचालित किए जा सकते हैं।
उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार को सुझाव दिया है कि जिन परियोजनाओं में गंभीर अनियमितताएं नहीं मिली हैं या जहां प्रारंभिक जांच संतोषजनक रही है, वहां चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि सभी परियोजनाओं को एक साथ रोकने के बजाय जोखिम के आधार पर निर्णय लेना अधिक व्यावहारिक होगा।
गौरतलब है कि तारातला में निर्माणाधीन ढांचे के ढहने की घटना के बाद राज्य सरकार ने कोलकाता और आसपास के जिलों में जी+5 एवं उससे ऊंची इमारतों तथा बड़े वाणिज्यिक निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक लगाते हुए व्यापक सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया था।
इस ऑडिट के तहत निर्माण गुणवत्ता, स्वीकृत नक्शे, संरचनात्मक सुरक्षा और श्रम सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है।
रियल एस्टेट उद्योग का कहना है कि सुरक्षा ऑडिट आवश्यक है, लेकिन इसके पूरा होने तक सभी परियोजनाओं को ठप रखना निर्माण क्षेत्र और अर्थव्यवस्था, दोनों के हित में नहीं है। इसलिए सरकार को ऑडिट प्रक्रिया जारी रखते हुए नियामकीय निगरानी में निर्माण गतिविधियों को फिर से शुरू करने की अनुमति देनी चाहिए।