ई20 पेट्रोल को वैकल्पिक बनाने की मांग तेज

वाहन चालकों ने सरकार से मांगा विकल्प
Kolkata
ई20 पर उपभोक्ता चिंतित
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कोलकाता : देशभर में ई20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की अनिवार्य आपूर्ति को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब बड़ी संख्या में वाहन चालकों ने मांग की है कि ई20 पेट्रोल को अनिवार्य बनाने के बजाय वैकल्पिक रखा जाए, ताकि उपभोक्ता अपनी गाड़ी की क्षमता और जरूरत के अनुसार ईंधन का चयन कर सकें।

वाहन मालिकों का कहना है कि विशेषकर पुराने मॉडल की कारों और दोपहिया वाहनों के लिए ई20 उपयुक्त नहीं है और इससे इंजन की कार्य क्षमता तथा माइलेज प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

मोटर चालकों का कहना है कि कई वाहन अभी भी ई10 या कम एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के अनुरूप तैयार किए गए हैं। ऐसे में ई20 को एकमात्र विकल्प बना देने से लाखों उपभोक्ताओं के सामने तकनीकी और आर्थिक समस्या खड़ी हो सकती है।

उनका तर्क है कि सरकार को ई20 के साथ-साथ सामान्य पेट्रोल की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि लोग अपनी गाड़ी के अनुरूप ईंधन का चयन कर सकें।

वाहन मालिकों ने यह भी कहा कि ई20 ईंधन को लेकर अभी भी लोगों के बीच पर्याप्त जागरूकता नहीं है। अधिकांश उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं है कि उनका वाहन ई20 के अनुकूल है या नहीं।

उनका मानना है कि ईंधन नीति लागू करने से पहले व्यापक जनजागरूकता अभियान, तकनीकी मार्गदर्शन और वाहन निर्माताओं की स्पष्ट सलाह उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

हाल के दिनों में ई20 पेट्रोल को लेकर सार्वजनिक बहस और भी तेज हुई है। कुछ उपभोक्ताओं तथा वाहन संगठनों ने ईंधन की गुणवत्ता, इंजन पर संभावित प्रभाव और माइलेज में कमी जैसी चिंताएं जताई हैं।

हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि देशभर में उपलब्ध ई20 पेट्रोल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है तथा परीक्षणों में क्लोराइड या नमी की कोई असामान्य मात्रा नहीं पाई गई। कंपनियों ने उपभोक्ताओं से भरोसे के साथ ई20 का उपयोग जारी रखने की अपील भी की है।

केंद्र सरकार का कहना है कि ई20 कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना तथा स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देना है। सरकार फिलहाल ई20 से पीछे हटने या फिर से ई10 की व्यवस्था लागू करने के पक्ष में नहीं है।

इसके बावजूद वाहन चालकों का एक वर्ग लगातार यह मांग कर रहा है कि जब तक सभी वाहन पूरी तरह ई20 के अनुकूल नहीं हो जाते, तब तक ई20 को वैकल्पिक रखा जाए और उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने की स्वतंत्रता दी जाए।

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