

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल में पुलिस महानिदेशक (डीजी) की नियुक्ति को लेकर एक अभूतपूर्व कानूनी और प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। राज्य सरकार द्वारा डीजी पद के लिए भेजे गए प्रस्तावित पैनल को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और इस मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की सलाह दी है। वर्तमान में राज्य पुलिस के डीजी के रूप में वरिष्ठ IPS राजीव कुमार जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार पिछले साल 31 दिसंबर को यूपीएससी के एआईएस शाखा के निदेशक नंद किशोर कुमार द्वारा तत्कालीन मुख्य सचिव मनोज पंत को भेजे गए पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में असामान्य देरी की है। पत्र के अनुसार, पश्चिम बंगाल में डीजी (हेड ऑफ पुलिस फोर्स) का पद 28 दिसंबर 2023 से रिक्त माना जा रहा है। ‘प्रकाश सिंह’ मामले का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत, किसी भी राज्य को मौजूदा डीजी के सेवानिवृत्त होने से कम से कम तीन महीने पहले यूपीएससी को पैनल भेजना होता है। इस लिहाज से राज्य को सितंबर 2023 तक प्रस्ताव भेज देना चाहिए था।
हालांकि, राज्य सरकार ने लगभग डेढ़ साल की देरी के बाद जुलाई 2025 में पैनल भेजा। इस देरी के चलते यूपीएससी की एमपैनलमेंट समिति में कानूनी वैधता को लेकर मतभेद पैदा हुए, जिसके बाद अटॉर्नी जनरल से राय ली गई। अटॉर्नी जनरल ने साफ कहा कि इतनी अधिक देरी को माफ करने का कोई प्रावधान नहीं है और ऐसा करना गंभीर असंगतियां पैदा करेगा। इसी आधार पर यूपीएससी ने राज्य का प्रस्ताव लौटा दिया और सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट निर्देश लेने की सलाह दी है। चुनाव से पहले पुलिस प्रशासन के शीर्ष पद पर इस गतिरोध को राज्य सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। देखना यह हैं कि कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर राज्य सरकार इस संकट से कैसे मुकावला करती हैं।