प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी हेलिकॉप्टर उड़ान की अनुमति न मिलने की समस्या का सामना करना पड़ा। मंगलवार को बीरभूम दौरे से पहले नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने उनके हेलिकॉप्टर को उड़ान की मंजूरी नहीं दी, जिससे उनका कार्यक्रम प्रभावित हुआ। टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा साजिश के तहत अभिषेक की सभाओं को बाधित करने की कोशिश कर रही है।
अभिषेक को मंगलवार दोपहर बेहाला फ्लाइंग क्लब से हेलिकॉप्टर के जरिए बीरभूम जाना था, लेकिन तय समय तक उड़ान नहीं हो सकी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सभी नियमों का पालन करते हुए अनुमति के लिए आवेदन किया गया था, फिर भी बिना कारण बताए उड़ान की अनुमति रोक दी गई। हालांकि, बाद में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मदद से एक हेलिकॉप्टर की व्यवस्था की गई। झारखंड सरकार के हेलिकॉप्टर से अभिषेक बनर्जी दोपहर करीब ढाई बजे बीरभूम के लिए रवाना हुए। देर होने के कारण वह सीधे रामपुरहाट में सभा स्थल पहुंचे। इससे नाराज तृणमूल नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
तकनीकी कारण या राजनीतिक दबाव?
अभिषेक बनर्जी के हेलिकॉप्टर को उड़ान की अनुमति न मिलना केवल एक तकनीकी अड़चन थी या इसके पीछे राजनीतिक दबाव था—इसी सवाल ने मंगलवार को बंगाल की राजनीति को गरमा दिया। टीएमसी का दावा है कि जेड श्रेणी की सुरक्षा पाने वाले अभिषेक के लिए सभी अनिवार्य प्रक्रियाएं—72 घंटे पहले आवेदन, डबल इंजन हेलिकॉप्टर, पायलट विवरण और उड़ान मार्ग—पूरी की गई थीं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सुबह 11 बजे तक मंजूरी मिलने की बात थी, लेकिन बिना किसी लिखित कारण के अनुमति रोक दी गई।
इसी आधार पर तृणमूल ने इसे केंद्र सरकार की “राजनीतिक साजिश” करार दिया। दूसरी ओर, कयास लगाए गए कि कोहरे और मौसम की स्थिति भी कारण हो सकती है। हालांकि तृणमूल का तर्क है कि जब अन्य हेलिकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति दी गई, तब केवल अभिषेक के हेलिकॉप्टर को रोकना सवाल खड़े करता है। घटना ने एक बार फिर केंद्र-राज्य टकराव, सुरक्षा प्रोटोकॉल की पारदर्शिता और राजनीतिक निष्पक्षता पर बहस तेज कर दी है।