Bhoot Chaturdashi 2025: अंधकार की देवी की आराधना और रहस्यमयी परंपराएं

भूत चतुर्दशी (Indian Halloween) , जिसे काली चौदस (Kali Chaudas) के नाम से भी जाना जाता है, पश्चिम भारत का एक रहस्यमयी और शक्तिशाली पर्व है।
Bhoot Chaturdashi 2025: अंधकार की देवी की आराधना और रहस्यमयी परंपराएं
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कोलकाता : भूत चतुर्दशी (Indian Halloween) , जिसे काली चौदस (Kali Chaudas) के नाम से भी जाना जाता है, पश्चिम भारत का एक रहस्यमयी और शक्तिशाली पर्व है। इस दिन मां काली और वीर वेताल की पूजा की जाती है — यह वह रात्रि होती है जब अंधकार की देवी की ऊर्जा सबसे प्रबल मानी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जो साधक इस दिन मध्यरात्रि में श्मशान में पूजा करते हैं, उन्हें नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा प्राप्त होती है।

भूत चतुर्दशी 2025 तिथि और मुहूर्त (Bhoot Chaturdashi Timing & Date):

तारीख: 19 अक्टूबर 2025, रविवार

काली चौदस पूजा मुहूर्त: रात 11:41 बजे से 12:31 बजे तक (20 अक्टूबर)

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 19 अक्टूबर दोपहर 1:51 बजे

चतुर्दशी तिथि समाप्त: 20 अक्टूबर दोपहर 3:44 बजे

बंगाल में भूत चतुर्दशी का अद्भुत रूप

बंगाल में यह पर्व ‘इंडियन हैलोवीन’ के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस दिन सुबह जल्दी स्नान करके भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और शाम को मां काली, भगवान यमराज, श्रीकृष्ण, शिव, हनुमान और विष्णु की विशेष पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन की साधना से भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।

विशेष अनुष्ठान – “चोड्डो प्रोदीप”

भूतों के प्रभाव से बचने के लिए सूर्यास्त के बाद घरों में 14 मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं, जिन्हें ‘चोड्डो प्रोदीप’ कहा जाता है। ये दीपक घर के दरवाजों, खिड़कियों, तुलसी के पौधे और आंगन के कोनों में रखे जाते हैं। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।

भूत चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भूत चतुर्दशी की पूजा से न केवल बुरी शक्तियों से रक्षा होती है, बल्कि पूर्वजों की आत्माओं को भी शांति मिलती है। यह वह दिन है जब बुरी आत्माएं अत्यधिक सक्रिय होती हैं, इसलिए मां काली की उपासना कर लोग अपने घर और परिवार को हर नकारात्मक शक्ति से सुरक्षित रखने की प्रार्थना करते हैं। यह पर्व भय और भक्ति का अद्भुत संगम है — जहां अंधकार की देवी की आराधना के साथ जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता लाने का संदेश छिपा है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भूत चतुर्दशी की पूजा से न केवल बुरी शक्तियों से रक्षा होती है, बल्कि पूर्वजों की आत्माओं को भी शांति मिलती है। यह वह दिन है जब बुरी आत्माएं अत्यधिक सक्रिय होती हैं, इसलिए मां काली की उपासना कर लोग अपने घर और परिवार को हर नकारात्मक शक्ति से सुरक्षित रखने की प्रार्थना करते हैं।

यह पर्व भय और भक्ति का अद्भुत संगम है — जहां अंधकार की देवी की आराधना के साथ जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता लाने का संदेश छिपा है।

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