

कोलकाता : एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसकी तस्करी करने और उसे जबरन देह व्यापार में धकेलने के मामले में अलीपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। दोषियों में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। विशेष पॉक्सो अदालत की न्यायाधीश रिम्पा दास ने मामले में यह फैसला सुनाया। अदालत शुक्रवार को दोषियों की सजा की घोषणा करेगी। दोषी ठहराए गए आरोपियों की पहचान मिर्जा मोल्ला उर्फ गाजी, शेखर अली लस्कर, सोमनाथ दास, अंजुरा बेगम और माबुदा उर्फ मुफाजा सरदार के रूप में हुई है। मामले के विशेष सरकारी अधिवक्ता अर्निबान गुहा ठाकुरता के अनुसार, घटना 12 जुलाई 2019 को दक्षिण 24 परगना के कैनिंग थाना क्षेत्र में हुई थी। आरोप है कि बासंती थाना क्षेत्र के रामचंद्रखाली गांव की 17 वर्षीय नाबालिग को उसका एक रिश्तेदार झूठे वादे का लालच देकर घर से लेकर आया था। बाद में उसे मिर्जा मोल्ला उर्फ गाजी के हवाले कर दिया गया। आरोप के मुताबिक, मिर्जा मोल्ला और शेखर अली लस्कर नाबालिग को कैनिंग से शियालदह होते हुए दिल्ली ले गए। वहां उसे अंजुरा बेगम और सोमनाथ दास के हाथों कथित तौर पर बेच दिया गया। इसके बाद दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में नाबालिग को जबरन देह व्यापार में धकेल दिया गया। इधर, नाबालिग के पिता ने घटना को लेकर बासंती थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में मामले को कैनिंग थाने में स्थानांतरित कर दिया गया। मामले की जांच सीआईडी ने शुरू की। जांच के दौरान 25 अक्टूबर 2019 को जांच अधिकारियों की टीम ने नाबालिग को बरामद कर लिया। बरामदगी के बाद उसे बांगुर अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया। मामले में पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और पॉक्सो की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। अदालत में 22 अक्टूबर 2021 को पांचों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए। सुनवाई के दौरान कुल 11 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अलीपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया।