प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महानगर में 4 से 12 जनवरी तक आयोजित 8वें राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव ने भारतीय रंगमंच की विविधता और वैचारिक गहराई को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। मिनर्वा नाट्य संस्कृति चर्चा केंद्र द्वारा, पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में देशभर से आए नाट्य समूहों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
खास तौर पर हिंदी रंगमंच की दो प्रस्तुतियां ‘चाक’ और ‘1984 अपलोडिंग’ दर्शकों के बीच चर्चा का केंद्र रहीं। कोलकाता के लिटिल थेस्पियन समूह द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘चाक’ सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं की मार्मिक कथा कहता है। उमा झुनझुनवाला के संवेदनशील निर्देशन में यह नाटक पाकिस्तान विभाजन और 1971 के बाद भारतीय मुसलमानों के सामने आई पहचान, असुरक्षा और संघर्ष की जटिलताओं को उजागर करता है। लेखक एस. एम. अजहर आलम की सशक्त कथा, मुरारी रायचौधरी के प्रभावी संगीत और सादगीपूर्ण मंच सज्जा ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से कथा से जोड़ दिया।
वहीं, मुंबई के यूनिकॉर्न एक्टर्स स्टूडियो का नाटक ‘1984 अपलोडिंग’ समकालीन तकनीकी समाज पर तीखा सवाल उठाता है। हैप्पी रणजीत के निर्देशन में जॉर्ज ऑरवेल के विचारों से प्रेरित यह प्रस्तुति डिजिटल निगरानी, सत्ता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को आधुनिक संदर्भ में सामने लाती है। प्रयोगधर्मी मंच संरचना और दमदार अभिनय ने इसे विचारोत्तेजक बना दिया। इन दोनों प्रस्तुतियों ने साबित किया कि हिंदी रंगमंच आज भी प्रासंगिक है और समाज के ज्वलंत सवालों पर सार्थक संवाद रचने में सक्षम है।