250 साल पुरानी लक्ष्मी और मंगलचंडी की मूर्तियां आखिरकार लौटीं अपने घर

ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना के कारण सात साल तक कई जगहों पर रहा ठिकाना अब नए मकान में बना स्थायी पूजा कक्ष
Kolkata
250 साल पुरानी मूर्तियां लौटीं अपने घर
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कोलकाता : कोलकाता के दुर्गा पितुरी लेन में रहने वाले सेन परिवार के लिए यह एक बेहद भावुक पल है। ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना के दौरान हुए धंसाव और उसके बाद के संकट के कारण 2019 में घर टूटने पर ये 250 साल पुरानी मूर्तियाँ पिछले सात सालों से होटलों और किराए के फ्लैटों में भटक रही थीं।

अंततः सेन परिवार की कुलदेवता माँ लक्ष्मी और माँ मंगलचंडी अपने नवनिर्मित मकान के स्थायी पूजा कक्ष में लौट आई हैं। अब इन दोनों प्राचीन प्रतिमाओं को पहली मंजिल पर बनाए गए 10×12 फीट के पूजा कक्ष में स्थापित किया गया है, जहां प्रतिदिन पुजारी द्वारा विधिवत उनकी पूजा-अर्चना की जा रही है।

केवल घर वापसी नहीं, बल्कि वर्षों की पीड़ा का अंत

आशा सेन ने बताया कि दोनों मूर्तियां लगभग 250 वर्ष पुरानी हैं। उनके अनुसार इन्हें इसी स्थान पर स्थित उनके पैतृक घर में उन्हें स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि 15, दुर्गा पितुरी लेन स्थित उनका मकान देवोत्तर संपत्ति है, जो मां लक्ष्मी और मां मंगलचंडी को समर्पित है।

आशा सेन ने कहा, "मेरा विश्वास है कि मां लक्ष्मी और मां मंगलचंडी की कृपा से ही हम 31 अगस्त 2019 की बड़ी दुर्घटना, उसके बाद हुए धंसाव, घर में आई दरारों, मकान के गिराए जाने और वर्षों तक बार-बार ठिकाना बदलने जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना कर सके। आखिरकार उन्हीं की कृपा से हम अपने पुराने मोहल्ले और नए घर में लौट पाए हैं।"

धंसाव के बाद शुरू हुआ विस्थापन का दौर

गौरतलब है कि 31 अगस्त 2019 को ईस्ट-वेस्ट मेट्रो सुरंग निर्माण के दौरान हुए धंसाव के बाद सेन परिवार को तत्काल घर खाली करना पड़ा। सबसे पहले उन्हें एस्प्लेनेड स्थित एक होटल में ठहराया गया। वहां करीब एक महीने रहने के बाद कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने उन्हें मानिकतला में किराये के एक फ्लैट में स्थानांतरित किया।

कुछ महीनों बाद अधिकारियों ने बताया कि मकान की दरारों की मरम्मत हो चुकी है और परिवार वापस अपने घर लौट सकता है। लेकिन 11 मई 2022 को एक बार फिर इलाके में धंसाव हुआ, जिससे कई इमारतें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं और लोगों को दोबारा तत्काल घर खाली करना पड़ा।

मूर्तियां और तुलसी का पौधा हर जगह रहा साथ

दूसरी बार विस्थापन के बाद परिवार को पहले चांदनी चौक के पास एक होटल और फिर बेलेघाटा स्थित एक अपार्टमेंट में रखा गया। अंततः 1 जुलाई को सेन परिवार अपने पुराने मोहल्ले में बने नए मकान में लौट आया।

आशा सेन ने बताया कि इन सात वर्षों के दौरान उन्होंने जहां-जहां भी ठिकाना बदला, मां लक्ष्मी और मां मंगलचंडी की मूर्तियों के साथ तुलसी का पौधा भी हमेशा उनके साथ रहा। अब इन प्राचीन प्रतिमाओं को नए घर में स्थायी रूप से स्थापित कर दिया गया है, जिससे पूरे परिवार ने राहत और सुकून की सांस ली है।

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