

रांची : झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को 21वें दिन जारी है और प्रदर्शनकारियों ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर ‘तिरंगा यात्रा’ निकालने की योजना बनाई है।
प्रदर्शनकारियों ने 10 अगस्त को राज्य विधानसभा मार्च के दौरान हुई हिंसा के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर रांची जिला प्रशासन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर निकाली जाने वाली ‘तिरंगा यात्रा’ उनके आंदोलन को और मजबूत करेगी।
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी)-झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) रिफॉर्म मंच के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे छात्र भर्ती परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता, कई परीक्षाओं को रद्द करने और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति से अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों द्वारा सोमवार को निकाले गए विधानसभा मार्च के दौरान हुई हिंसा में शामिल असामाजिक तत्वों की पहचान के लिए पुलिस वीडियो फुटेज खंगाल रही है।
राज्य विधानसभा की ओर 10 अगस्त को निकाले गए मार्च के दौरान सुरक्षाकर्मियों के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प हो गई थी, जिसके बाद 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
रांची के पुलिस अधीक्षक पारस राणा ने बताया कि निषेधाज्ञा के उल्लंघन, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोपों में विधानसभा थाने में मामला दर्ज किया गया है।
मानसून सत्र से पहले रांची प्रशासन ने विधानसभा भवन के 750 मीटर के दायरे में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई थी।
पुलिस उप-अधीक्षक (हटिया) नीरज कुमार ने बताया कि अभी तक न कोई गिरफ्तारी हुई न ही किसी को हिरासत में लिया गया है। पुलिस उस दिन हुई हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के लिए वीडियो फुटेज खंगाल रही है।
इस झड़प में 14 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, पानी की बौछारें की और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया।
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के नेता रवींद्र पासवान ने सरकार से अपील की कि वह विद्यार्थियों को निशाना न बनाए।
उन्होंने कहा, यदि प्रशासन ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन हम प्रशासन और झारखंड सरकार से अपील करते हैं कि किसी भी छात्र के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज न की जाए।
इस बीच, 13 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है।
विधानसभा मार्च में शामिल होने के बाद हालत बिगड़ने पर महतो को सोमवार को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को उन्होंने रांची के सिविल सर्जन से विरोध स्थल पर लौटने की अनुमति मांगी थी। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, भूख हड़ताल पर बैठे चार अन्य छात्रों का भी इलाज किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में सात आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट तामिल कराने के लिए कई स्थानों पर छापेमारी भी की है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दोहराया है कि उनकी सरकार भर्ती परीक्षा सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है और प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द कर दी जाएगी। उन्होंने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर राजनीतिक लाभ के लिए आंदोलन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
भाजपा ने भी आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इस मुद्दे पर 1,200 से अधिक विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन ने राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया है और इसके सदस्यों में बार-बार किए गए बदलावों का हवाला दिया है।