

रांची : झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप स्कूली बच्चों को बहुभाषी शिक्षा प्रदान करने में आने वाली चुनौतियों पर मंथन के लिए यहां आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का बुधवार को उद्घाटन किया।
कुमार ने राष्ट्रीय बहुभाषी शिक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा, प्राथमिक शिक्षा के लिए यह सम्मेलन एक सशक्त और सार्थक पहल है। झारखंड इस बहुलवादी देश का एक खूबसूरत रत्न है, जहां एक पुरानी कहावत सच साबित होती है -कोस-कोस पर पानी बदले दस कोस पर वाणी।
मंत्री ने कहा कि राज्य में पांच प्रमुख जनजातीय भाषाएं और चार क्षेत्रीय भाषाएं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के 24 जिलों को एक ही भाषा से जोड़ना संभव नहीं है। कुमार ने कहा, जब हम इन भाषाई फूलों को एक साथ गूंथने की बात करते हैं, तो झारखंड का प्रतिनिधित्व करने के लिए कम से कम नौ फूल होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने समग्र शिक्षा के लिए उपयुक्त भाषा और शैक्षणिक कौशल को बढ़ावा देने (पलाश) नामक बहुभाषी शिक्षा परियोजना के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा में पांच जनजातीय भाषाओं कुरुख, संथाली, मुंडारी, हो और खारिया को शामिल किया है, लेकिन अभी तक केवल आठ जिलों में ही ऐसा किया गया है।
कुमार ने कहा कि राज्य की चार क्षेत्रीय भाषाओं खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया और कुर्माली को भी प्राथमिक स्तर पर उनके संरक्षण और शिक्षण को सुनिश्चित करने के लिए ‘पलाश’ पहल के तहत शामिल करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, मैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इन चार क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने का अनुरोध करूंगा, क्योंकि इसके बिना विकसित झारखंड का सपना अधूरा रह जाता है। इस दिशा में भी प्रयास किए जाने चाहिए।
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