

राजगीर : भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को नालंदा विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं और कहा कि इस संस्थान से शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को मानवता की ‘साझा विरासत’ प्राप्त होती है।
उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों में आधे से अधिक अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी हैं, जो 30 से अधिक देशों से आए हैं। राष्ट्रपति ने समारोह से पहले पौधारोपण अभियान में भी हिस्सा लिया और विश्वविद्यालय की ‘नेट-जीरो’ लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की।
‘नेट जीरो’ उत्सर्जन का मतलब है कि जो जितना कार्बन उत्सर्जन करता है, उतना ही कार्बन खत्म करने की व्यवस्था भी करे। ‘नेट जीरो’ का मतलब यह नहीं है कि कार्बन का उत्सर्जन शून्य हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘यह परिसर ‘नेट-जीरो’ कैंपस बनने की दिशा में स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उच्च शिक्षण संस्थानों को उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेतृत्व करना चाहिए।
राष्ट्रपति ने अपने दौरे की शुरुआत विश्वविद्यालय परिसर में बने ‘विश्व मित्रालय’ भवन के उद्घाटन से की। यह अत्याधुनिक भवन लगभग दो हजार लोगों की क्षमता वाला है और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति नालंदा विश्वविद्यालय की ‘विजिटर’ भी हैं।