झारखंड : विपक्ष ने बिजली आपूर्ति और धान की खरीद की 'धीमी गति' का मुद्दा उठाया

मार्च तक धान की खरीद से बिचौलियों को अवसर मिले : मरांडी
झारखंड विधानसभा
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रांची : झारखंड विधानसभा में गुरुवार को विपक्षी सदस्यों ने बिजली आपूर्ति की समस्या से लोगों को हो रही असुविधा जैसे मुद्दे उठाए और राज्य में धान की खरीद की धीमी गति का आरोप लगाया।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि मार्च तक धान की खरीद से बिचौलियों को अवसर मिले।

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के विधायक जयराम महतो ने कहा कि ट्रांसफार्मर खराब होने या तार क्षतिग्रस्त होने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल करने में सामान्य से अधिक समय लगता है, जिससे जनता को अपने दैनिक जीवन में काफी असुविधा होती है।

राज्य के ऊर्जा मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने सदन में कहा कि ट्रांसफार्मर बदलने में कभी-कभी देरी हो जाती है। महतो ने कहा, उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं होती कि ट्रांसफार्मर खराब होने या अन्य तकनीकी समस्याओं की स्थिति में शिकायत कहां दर्ज कराई जाए। सरकार को शिकायत निवारण प्रक्रिया को मजबूत करना चाहिए और ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए समय सीमा तय करनी चाहिए।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि बिजली मुफ्त नहीं है। उन्होंने कहा, लोग बिजली के लिए भुगतान करते हैं, इसलिए उन्हें विश्वसनीय सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार है। यदि कोई ट्रांसफार्मर खराब हो जाता है, तो उसे 24 घंटे के भीतर बदल दिया जाना चाहिए।

मंत्री ने कहा कि दूरदराज के गांवों तक ट्रांसफार्मर पहुंचाने के लिए वाहनों की कमी के कारण समस्या उत्पन्न होती है। कई बार ट्रांसफार्मर की कमी हो जाती है, और इन सभी कारणों से बिजली आपूर्ति बहाल करने में देरी होती है। हालांकि, विभाग इस स्थिति से निपटने का प्रयास कर रहा है।

एकल खिड़की शिकायत प्रकोष्ठ के बारे में महतो के प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने कहा कि लोग अपनी शिकायतें कार्यकारी अभियंता या मंडल कार्यालय में दर्ज करा सकते हैं। मंत्री ने कहा, गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए, विभाग जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर जारी करेगा ताकि लोग बिजली संबंधी शिकायतें आसानी से दर्ज करा सकें।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) लिबरेशन के विधायक अरूप चटर्जी ने राज्य में धान की खरीद की धीमी गति पर चिंता व्यक्त की। चटर्जी ने पूछा, सरकार ने धान की खरीद का 6 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा था और इसकी अंतिम तिथि 31 मार्च है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक केवल 3 लाख मीट्रिक टन धान की ही खरीद हो पाई है। क्या सरकार इस समय सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रही है ?

खाद्य आपूर्ति मंत्री इरफान अंसारी ने धान की खरीद में धीमी गति को स्वीकार किया और कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो अंतिम तिथि बढ़ा दी जाएगी।

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