

रांची : झारखंड विधानसभा में मंगलवार को सत्तापक्षा एवं विपक्ष के बीच कानून-व्यवस्था की ‘बदतर होती’ स्थिति, नौकरशाही का ‘प्रभुत्व’ और प्रदेश में कथित तौर पर व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर तीखी बहस हुई। इसी दौरान आजसू के विधायक निर्मल महतो को सदन में हंगामा करने के कारण बाहर निकाल दिया गया।
प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने गिरिडीह एवं पाकुड़ जिलों में कानून-व्यवस्था के उल्लंघन की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार अब ‘बबुआ’ बन गई है, जिसने कभी खुद को ‘अबुआ सरकार’ (हमारी सरकार) कहा था।
‘बबुआ’ सरकार से मरांडी का आशय था कि राज्य सरकार अब ‘बाबुओं’ (विभागों के नौकरशाह और कार्यालय प्रमुखों) द्वारा चलाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के ‘बाबू’ ‘अनुशासनहीन’ हो गए हैं और ‘सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार व्याप्त है’।
मरांडी ने मांग की कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर तुरंत चर्चा हो और सदन के बाकी काम को स्थगित किया जाए। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विपक्ष के नेता के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सदन नियमों के अनुसार चलता है।
उन्होंने याद दिलाया कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक एक दिन पहले ही हुई थी। मंत्री ने कहा कि विपक्ष ने उस दौरान इन मुद्दों को नहीं उठाया था। किशोर ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए सदन की कार्यवाही को बाधित करने की कोशिश कर रहा है।
विधानसभा में एक समय, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता और कैबिनेट मंत्री सुदीव्य कुमार तथा आजसू पार्टी के विधायक निर्मल महतो के बीच तीखी बहस हुई। निर्मल सदन में आसन के निकट चले गए और कानून-व्यवस्था एवं भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
सदन की कार्यवाही बाधित होने पर विधानसभा अध्यक्ष रबिंद्र नाथ महतो ने आदेश दिया कि निर्मल को सदन से बाहर निकाला जाए। अध्यक्ष के आदेश पर मरांडी ने कड़ी आपत्ति जतायी और आरोप लगाया कि आजसू विधायक को आसन के समीप जाने के लिये उकसाया गया था।
किशोर ने विपक्षी विधायकों से शांत रहने की अपील की और कहा कि सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार संचालित होती है। उन्होंने कहा, आप सभी को बैठकर नियमों के अनुसार ही सवाल उठाने चाहिए। सरकार हर प्रश्न का पूरी तैयारी के साथ उत्तर देने के लिए तैयार है।
संसदीय कार्य मंत्री की अपील के बाद, अध्यक्ष ने निर्मल से कहा कि वे पुनः सदन की कार्यवाही में शामिल हों। उधर, भाकपा माले के विधायक अरुप चटर्जी ने भाषाई अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए।