झारखंड : 9 साल की उम्र में हो गई पिता की हत्‍या, बेटी ने चुनौतियों को पार कर पूरा किया सपना

मां ने हिम्मत नहीं हारी और परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अथक परिश्रम किया
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
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हजारीबाग : झारखंड के हजारीबाग जिले के एक दूरस्थ गांव की रहने वाली 22 वर्षीय रंजना कुमारी ने अपने पिता की हत्या के सदमे और वर्षों की आर्थिक कठिनाइयों को पार करते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) में शामिल होने के अपने सपने को साकार किया है।

रंजना का चयन 2024 में BSF जनरल ड्यूटी (जीडी) कांस्टेबल के रूप में हुआ था। उन्होंने हाल में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित BSF प्रशिक्षण केंद्र में एक साल का प्रशिक्षण पूरा किया है और पाकिस्तान सीमा के निकट राजस्थान के जैसलमेर में अपनी तैनाती की प्रतीक्षा कर रही हैं।

तातिझरिया ब्लॉक के अमनारी गांव की रहने वालीं रंजना तब केवल आठ साल की थी और कक्षा दो में पढ़ रही थी जब जनवरी 2013 में उनके पिता मनोज कुमार कुशवाहा की शहर के एक होटल में हत्या कर दी गई थी। उनकी मां नूतन देवी, जो एक आंगनवाड़ी सहायिका थीं और लगभग 4,000 रुपये प्रति माह कमाती थीं, उन्होंने रंजना और उनकी दो बहनों का पालन-पोषण किया।

रंजना ने बताया, मेरे पिता शहर के एक होटल में मैनेजर के तौर पर काम करते थे, जहां उनकी हत्या कर दी गई। उस पल हमारी जिंदगी में अंधेरा छा गया, लेकिन मेरी मां ने हिम्मत नहीं हारी और परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अथक परिश्रम किया।

अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए उन्होंने कक्षा 10वीं तक के लगभग 40 छात्रों को ट्यूशन देना शुरू किया, जिससे उन्हें इंटरमीडिएट और स्नातक की पढ़ाई पूरी करने में मदद मिली। वर्तमान में वह हजारीबाग के विष्णुगढ़ स्थित टेकलाल महतो डिग्री कॉलेज से इतिहास में ऑनर्स की डिग्री हासिल कर रही हैं।

रंजना ने कहा, मैंने ठान लिया था कि मैं अपने पिता की हत्या को अपने सपनों में बाधा नहीं बनने दूंगी। मैं हमेशा से BSF की वर्दी पहनना चाहती थी। रंजना ने बताया कि उन्होंने BSF में उच्च पदों के लिए परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी है।

कठिनाइयों का सामना कर रही अन्य लड़कियों से उम्मीद न छोड़ने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा, अगर मैं अपने पिता को खोने के बावजूद एक छोटे से गांव से आकर ये सफलता हासिल कर सकती हूं, तो अन्य लड़कियां भी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के माध्यम से अपने सपनों को साकार कर सकती हैं।

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