हजारीबाग में 8 साल में 15.41 करोड़ की हेराफेरी, तीन कर्मचारी गिरफ्तार, 21 खाते फ्रीज

हजारीबाग-बोकारो में राजकोषीय घोटालों से हड़कंप
सांकेतिक तस्वीर
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हजारीबाद : हजारीबाग जिले के कोषागार विभाग में तैनात तीन कर्मचारियों को पिछले 8 वर्ष में दो बैंक खातों से 15.41 करोड़ रुपये का गबन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

हजारीबाग के उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने गुरुवार को बताया कि राज्य के वित्त विभाग द्वारा आंकड़ों के विश्लेषण के माध्यम से संदिग्ध लेन-देन की पहचान करने के बाद गिरफ्तारियां की गईं। शुरुआती पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने वित्तीय अनियमितताओं में अपनी संलिप्तता कथित तौर पर स्वीकार की।

हजारीबाग के उपायुक्त द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यहां अतिरिक्त कलेक्टर संतोष कुमार सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच दल ने कोषागार के रिकॉर्ड की जांच की।

विज्ञप्ति में कहा गया है, सरकारी धन की अवैध निकासी के लिए अस्थायी भुगतान आईडी का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई और इस धन को बाद में विभिन्न संदिग्ध बैंक खातों में अंतरित कर दिया गया था। जांच के बाद 21 संदिग्ध खातों को ‘फ्रीज’ कर दिया गया, जिससे 1.6 करोड़ रुपये की राशि जब्त की गई। जिला कोषागार अधिकारी द्वारा लोहसिंघना थाने में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

शंभू कुमार, रजनीश सिंह और धीरेंद्र सिंह ये तीनों लोग हजारीबाग स्थित पुलिस विभाग की लेखा शाखा में कार्यरत हैं।

इससे पहले मंगलवार को बोकारो जिले में झारखंड पुलिस के एक लेखाकार को पुलिस वेतन खाते से 4.29 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

कोषागार अधिकारी गुलाब चंद ओरांव ने बोकारो स्टील सिटी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी और उपायुक्त अजय नाथ झा के निर्देश पर आरोपी कौशल कुमार पांडेय को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ‘अकाउंटेंट’ को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।

विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) बोकारो और हजारीबाग में हुए राजकोषीय घोटालों को लेकर हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की।

पार्टी के प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि अगर इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जाती है, तो कई प्रभावशाली तथा ‘सफेदपोश’ हस्तियों का पर्दाफाश होना तय है। साह ने आरोप लगाया कि राजकोष घोटाला वास्तव में जितना दिखाया जा रहा है उससे कहीं अधिक जटिल और संगठित है।

BJP नेता ने आरोप लगाया, बोकारो में गिरफ्तार कौशल पांडेय के पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से लंबे समय से घनिष्ठ संबंध रहे हैं। इसी वजह से उन्हें पूर्व DGP द्वारा उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण के लिए सम्मानित भी किया गया था। इस स्थिति को देखते हुए यह मानना ​​मुश्किल है कि लेखा विभाग का एक अकेला लिपिक मात्र 25 महीनों में 63 अनधिकृत निकासी कर सकता है।

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