सीटीईटी अनिवार्यता पर टीएसजी भास्कर की आपत्ति, नीति की समीक्षा की मांग

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सीटीईटी अनिवार्यता पर टीएसजी भास्कर की आपत्ति, नीति की समीक्षा की मांग
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2027 तक परीक्षा पास न करने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति का खतरा

पदोन्नति पर रोक से शिक्षकों में बढ़ी नाराजगी

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अभियान समिति के अध्यक्ष टीएसजी भास्कर ने बुधवार को सेवारत शिक्षकों के लिए सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट अनिवार्य किए जाने के हालिया आदेश पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियम को पूर्व प्रभाव से लागू करना अनुभवी शिक्षकों के लिए अन्यायपूर्ण और हानिकारक है। एक बयान में उन्होंने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य बनाना एक स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन इसे उन शिक्षकों पर लागू करना जो पहले से 20-25 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, अनुचित है। उन्होंने बताया कि शिक्षा निदेशालय द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद जारी आदेश के तहत सेवारत शिक्षकों को सीटीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है, अन्यथा 1 सितंबर 2027 तक परीक्षा पास न करने पर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है। भास्कर ने आगे कहा कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें अस्थायी राहत दी गई है, लेकिन जब तक वे सीटीईटी पास नहीं करेंगे, उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी। इस कदम को “अत्याचार” बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए पर्याप्त तैयारी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा वर्ष में केवल एक बार आयोजित होती है और शिक्षकों को न तो उचित प्रशिक्षण दिया गया है और न ही कोचिंग की कोई व्यवस्था है। उन्होंने कहा, “आखिरी सीटीईटी परीक्षा वर्ष 2024 में हुई थी और वर्ष 2025 में कोई परीक्षा आयोजित नहीं की गई। ऐसे में बिना उचित मार्गदर्शन और प्रश्नपत्र के स्वरूप की जानकारी के शिक्षकों से परीक्षा पास करने की अपेक्षा करना तर्कसंगत नहीं है।” कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि यह नीति शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है और इसे भारतीय जनता पार्टी सरकार की निजीकरण नीति से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि देशभर में लगभग 90,000 स्कूल निजीकरण के तहत बंद किए गए हैं। न्यायिक पहलुओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की है और अंडमान-निकोबार प्रशासन को भी शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए ऐसा कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, “शिक्षक विद्यार्थियों के लिए भगवान के समान होते हैं और उन्हीं के कारण समाज में अधिकारी और नेता तैयार होते हैं।”


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