सूडान में मंडरा रहा बड़े नरसंहार का खतरा, विद्रोही बलों ने रणनीतिक शहर को घेरा

अल-ओबेद की घेराबंदी से बिजली, पानी, भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं ठप, पांच लाख से अधिक नागरिकों पर जान का गंभीर खतरा, बड़े जमीनी हमले की आशंका गहराई
करीब 38 अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और राहत संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सूडान में जारी गृहयुद्ध अब और भयावह मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है।
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सूडान में जारी गृहयुद्ध अब और भयावह मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। देश के नॉर्थ कोर्डोफान राज्य की राजधानी अल-ओबेद (El Obeid) को अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) ने चारों ओर से घेर लिया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो शहर में बड़े पैमाने पर नरसंहार और मानवीय त्रासदी हो सकती है।

करीब 38 अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और राहत संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
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RSF ने लड़ाकों और हथियारों की संख्या बढ़ाई

अल-ओबेद को सूडान का एक रणनीतिक शहर माना जाता है। यहां से राजधानी खार्तूम और दारफुर क्षेत्र के बीच महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्ग गुजरते हैं। पिछले करीब 18 महीनों से यह शहर घेराबंदी जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। हाल के दिनों में RSF ने शहर के आसपास अपने लड़ाकों और हथियारों की संख्या बढ़ा दी है, जिससे बड़े जमीनी हमले की आशंका और गहरा गई है।

मानवाधिकार संगठनों ने जारी की चेतावनी

करीब 38 अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और राहत संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अल-ओबेद में वही हालात बन रहे हैं, जो पहले दारफुर के एल-फाशेर में देखने को मिले थे, जहां बड़े पैमाने पर नागरिकों की हत्या और मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएं सामने आई थीं।

लाखों नागरिक खतरे में

रिपोर्टों के अनुसार, अल-ओबेद में करीब पांच लाख लोग रहते हैं। लगातार ड्रोन हमलों और घेराबंदी के कारण बिजली, पानी, भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। यदि RSF शहर पर बड़ा हमला करता है, तो हजारों नागरिकों की जान जोखिम में पड़ सकती है और मानवीय संकट और गहरा सकता है।

2023 से जारी है गृहयुद्ध

सूडान में अप्रैल 2023 से सेना (SAF) और अर्धसैनिक संगठन RSF के बीच भीषण संघर्ष जारी है। इस युद्ध में अब तक लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। संघर्ष ने देश को राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय संकट की गहरी खाई में धकेल दिया है।

करीब 38 अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और राहत संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
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