नेपाल में बाढ़ : हजारों लोग अस्थायी शिविरों में, दवाओं और साफ पानी की कमी

नुवाकोट , त्रिशूली अस्पताल , काठमांडू में बनाए गए हैं कई अस्थायी शिविर
Thousands in temporary camps; shortage of medicines and clean water
अस्थायी शिविर में समय काटता बाढ़ प्रभावित परिवार
Published on

नुवाकोट (नेपाल) : नेपाल में भीषण बाढ़ से बच निकले हजारों लोगों के लिए संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। बाढ़ में घर और सामान गंवाने के बाद विस्थापित परिवार अब अस्थायी शिविरों और सार्वजनिक इमारतों में रहने को मजबूर हैं। कई जगहों पर दवाओं, साफ पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई। रविवार तक 800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। सरकार के अनुसार, रसुवा में तीन और नुवाकोट में 15 राहत शिविर बनाए गए हैं। स्कूलों और सार्वजनिक एवं सामुदायिक भवनों में करीब 3,500 विस्थापितों के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई है। नुवाकोट में नौ अस्थायी केंद्रों में करीब 1,000 लोग रह रहे हैं। त्रिशूली अस्पताल के आसपास तीन शिविरों में भी करीब 1,000 लोगों ने शरण ली है। इन शिविरों में गर्भवती महिलाओं, हाल ही में मां बनी महिलाओं और इलाज की जरूरत वाले लोगों समेत बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार हैं। साफ पेयजल और स्वच्छता की कमी के कारण डॉक्टरों ने बीमारियां फैलने का खतरा जताया है। काठमांडू के येलो मोनेस्ट्री में भी करीब 500 विस्थापितों को आश्रय दिया गया है। यहां उन्हें मुफ्त भोजन मिल रहा है, लेकिन यह व्यवस्था लंबे समय तक जारी रखना संभव नहीं है।

बाढ़ के बाद लापता परिजनों को खोज रहे लोग

काठमांडू में त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल के बाहर अपने लापता रिश्तेदारों को ढूंढ रही एक महिला ने वहां जमा हुए पत्रकारों से, पूछा, ‘‘क्या आपके कैमरे हमारे लोगों को वापस ला पाएंगे?’’ महिला के रिश्तेदारों ने उसे सांत्वना देने की कोशिश की। दिल कुमारी मसरांगी मगर नामक महिला अस्पताल के गेट पर अपने लापता जीजा और भांजे की तस्वीरें लगा रही थी। उनके साथ ही वहां मृतकों की तस्वीरें और अब भी लापता लोगों के नामों की लंबी सूची भी लगी थी। उसने पत्रकारों से इस उम्मीद में अपनी कहानी साझा करने को कहा कि शायद किसी ने, कहीं न कहीं, उनके रिश्तेदारों को देखा हो। महिला ने कहा, ‘‘उम्मीद करने के अलावा अब कुछ नहीं बचा है। भले ही सिर्फ़ उनके शव ही मिलें, कम से कम हमें पता तो चल जाएगा।’’ वहीं सिंधुपालचोक के चौतारा की रहने वाली सोनिया केसी अपने लापता भाई शिवराम को ढूंढने के लिए तीन दिन तक काठमांडू के अस्पतालों के चक्कर लगाती रहीं। उनकी तीन बहनें तथा एक और भाई भी इस खोज में शामिल हो गए। उसने कहा, ‘‘जब तक वे मिल नहीं जाते, तब तक उम्मीद बनी हुई है।’’

मलबे के बीच परिवारों ने फिर जिंदगी संवारने की शुरू की कोशिश

पहले यहां सब कुछ था, लेकिन अब कुछ भी नहीं बचा है।’’ नेपाल के बाढ़ प्रभावित मध्य क्षेत्र के गल्छी लौटे नयन तिवारी के ये शब्द उस तबाही को बयां करते हैं, जहां परिवार मलबे में अपने सामान तलाशने और उजड़े घरों को फिर से बसाने की कोशिश कर रहे हैं। कक्षा 11 में पढ़ने वाले नयन और उनकी चचेरी बहन निवी तिवारी अपने क्षतिग्रस्त घर से कीचड़ और रेत हटाकर उपयोगी सामान बचा रहे हैं। बाढ़ के समय नयन काठमांडू में थे। हालात की जानकारी मिलते ही उन्होंने गल्छी में अपने परिवार को घर खाली कर ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा था। परिवार के निकलने के कुछ ही देर बाद पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि रास्ते में आने वाली हर चीज बह गई। धादिंग जिले का गल्छी काठमांडू से करीब 50 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। तिवारी परिवार का घर उनके बचपन और करीब एक दशक की यादों से जुड़ा है। नयन ने कहा कि घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है, लेकिन परिवार इसे फिर से बनाएगा। उनके मुताबिक आसपास के 15 से अधिक घर पूरी तरह बह गए। निवी ने कहा कि घर की हालत देखकर वह खुद को बेहद असहाय महसूस कर रही थीं। परिवार अब मलबा हटाकर घर को दोबारा रहने लायक बनाने में जुटा है और तत्काल जरूरतों के लिए राहत सामग्री पर निर्भर है। त्रिशूली और नुवाकोट में भी लोग मलबे के बीच सामान और लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं।

Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in