

थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित ‘दीपथून’ (दीपक स्तंभ) में दीप जलाने को लेकर जारी विवाद एक बार फिर कोर्ट पहुंच गया है। Madras High Court की मदुरै बेंच ने तमिलनाडु सरकार से इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।
थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी को लेकर यह विवाद हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदायों से जुड़ा हुआ है। पहाड़ी पर स्थित दीपथून को लेकर लंबे समय से अलग-अलग पक्षों के दावे और परंपराएं सामने आती रही हैं, जिससे यह मामला संवेदनशील बना हुआ है।
यह मामला तब और गंभीर हुआ जब सिंगल जज के आदेश के बावजूद पहाड़ी की चोटी पर दीप जलाने की प्रक्रिया लागू नहीं हो सकी। इसी आधार पर अवमानना से जुड़ी याचिकाएं भी दायर की गईं, जो फिलहाल लंबित हैं।
पिछली तमिलनाडु सरकार (Dravida Munnetra Kazhagam) पर आरोप है कि उसने कोर्ट के आदेश के अनुरूप कार्रवाई नहीं की। सरकार ने यह तर्क दिया था कि:
पारंपरिक रूप से दीपक नीचे की निर्धारित जगह पर जलाया जाता रहा है
पहाड़ी की चोटी पर दीप जलाने से कानून-व्यवस्था पर असर पड़ सकता है
धार्मिक स्थलों की संवेदनशीलता को देखते हुए टकराव की आशंका है
इसी बीच विपक्षी दल Bharatiya Janata Party ने सरकार पर तीखी आलोचना की थी।
मदुरै बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से जटिल नहीं बनाया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सिंगल जज के आदेश की वैधता पर अंतिम निर्णय लेगी और सभी पक्षों की दलीलों को सुना जाएगा।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 जून तक स्थगित कर दी है और सरकार से विस्तृत स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मौजूदा राज्य सरकार इस संवेदनशील विवाद में क्या रुख अपनाती है और अदालत के निर्देशों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।