

ईटानगर : अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के टक्सिंग सेक्टर में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की कथित गतिविधियों को लेकर शनिवार को ईटानगर के आईजी पार्क में विरोध प्रदर्शन किया गया। ‘सेव टक्सिंग-सेव अरुणाचल मूवमेंट कमिटी’ (STSAM) के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार से सीमा क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने तथा दूर-दराज के सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की मांग की। हालांकि, इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारतीय सेना पहले ही टक्सिंग क्षेत्र में चीनी घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र में PLA के कैंप बनाए जाने संबंधी आरोपों को गलत और निराधार बता चुकी है। इसलिए प्रदर्शन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पांच इलाकों में PLA की मौजूदगी का आरोप
STSAM से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि चीनी PLA ने टक्सिंग सेक्टर में पांच इलाकों पर कब्जा कर लिया है। यह दावा इससे पहले टक्सिंग स्थित NAH वेलफेयर सोसाइटी (NWS) भी कर चुकी है। NWS ने 26 जून 2026 को अपर सुबनसिरी के उपायुक्त को भेजे पत्र में ओयिंग (2445), पनियार, मारपन (मारनाफे), पोट्रांग झील और टिडिंगटांग का उल्लेख किया था। संगठन ने दावा किया था कि इन इलाकों में चीनी सेना ने कैंप, सड़क और पुल जैसी बुनियादी संरचनाएं बनाई हैं। NWS के आरोपों के बाद भारतीय सेना ने जून में बयान जारी कर कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी PLA की हालिया घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र में कैंप बनाए जाने संबंधी रिपोर्ट “गलत और बिना किसी आधार” की हैं। सेना का यह रुख इस विवाद को बेहद संवेदनशील बनाता है। इसके बावजूद स्थानीय संगठनों और कुछ राजनीतिक समूहों की ओर से टक्सिंग क्षेत्र में सीमा सुरक्षा और भारतीय सेना की गश्त से जुड़ी चिंताएं लगातार सामने आती रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय सीमा के सीमांकन की मांग
STSAM ने प्रदर्शन के दौरान मांग की कि भारत-चीन सीमा का समयबद्ध तरीके से स्पष्ट सीमांकन किया जाए और कथित रूप से चीनी कब्जे वाले इलाकों से PLA को पीछे हटाया जाए। समिति ने कहा कि सीमा क्षेत्र में सुरक्षा को केवल सैन्य मौजूदगी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। दूर-दराज के गांवों तक सड़क, पुल और संचार जैसी सुविधाएं पहुंचाना भी सीमा सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रदर्शनकारियों ने टक्सिंग क्षेत्र में सड़क और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग की। उनका कहना है कि खराब कनेक्टिविटी के कारण सुरक्षाबलों को सीमावर्ती इलाकों में नियमित गश्त और तेजी से आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, मजबूत सड़क नेटवर्क और बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि सीमा पर सेना की परिचालन क्षमता भी मजबूत होगी।
‘अरुणाचल रेजिमेंट’ बनाने की मांग
STSAM ने भारतीय सेना में एक अलग ‘अरुणाचल रेजिमेंट’ गठित करने की भी मांग रखी। समिति का तर्क है कि अरुणाचल के स्थानीय युवाओं को सीमा और इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों की बेहतर जानकारी होती है, इसलिए उन्हें संगठित रूप से सेना में शामिल करने से सीमावर्ती सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है। प्रदर्शनकारियों ने अरुणाचल प्रदेश की सभी राजनीतिक पार्टियों से सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील की। उनका कहना था कि चीन से जुड़ा सीमा मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं बल्कि राज्य और देश की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। प्रदर्शन के दौरान ‘चीनी PLA वापस जाओ’, ‘हमारी जमीन वापस करो’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे नारे भी लगाए गए।
टक्सिंग को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
टक्सिंग सेक्टर को लेकर हाल के महीनों में कई स्थानीय संगठनों और राजनीतिक समूहों ने चिंता जताई है। अगस्त में पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) की एक तथ्य-जांच समिति ने भी दावा किया था कि चीनी PLA ने टक्सिंग इलाके में भारतीय बलों की कुछ महत्वपूर्ण पेट्रोलिंग प्वाइंट तक पहुंच को प्रभावित किया है। हालांकि, इन दावों को लेकर भी सरकारी पक्ष अलग रहा है। वहीं, 29 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी टक्सिंग दौरे के बाद सीमावर्ती समुदायों और सुरक्षाबलों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक सहायता को प्राथमिकता देने की मांग की थी।
प्रधानमंत्री को ज्ञापन देने का दावा
STSAM ने कहा कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर टक्सिंग क्षेत्र में कथित चीनी गतिविधियों को रोकने, सीमा सुरक्षा मजबूत करने और बुनियादी ढांचे में तेजी लाने की मांग की है। समिति का कहना है कि सीमा पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा और विश्वास बनाए रखने के लिए सरकार को स्थानीय समुदायों की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए। टक्सिंग को लेकर वर्तमान विवाद में स्थानीय संगठनों के आरोप और केंद्र/सुरक्षा बलों की आधिकारिक स्थिति अलग-अलग हैं। NWS ने पांच इलाकों में PLA की मौजूदगी का आरोप लगाया है, जबकि भारतीय सेना ने जून में ऐसे आरोपों को निराधार बताया था। इसलिए फिलहाल इन इलाकों में चीनी कब्जे या नए सैन्य कैंप स्थापित किए जाने के दावे को आरोप के रूप में ही रिपोर्ट करना उचित होगा, जब तक सरकार या स्वतंत्र सत्यापन से इसकी पुष्टि नहीं होती।