सात लोगों की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों का विरोध

NH के खराब हिस्सों की तत्काल मरम्मत की मांग मौके पर भारी पुलिस बल तैनात

सात लोगों की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों का विरोध
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गुवाहाटी : असम के सोनापुर स्थित नज़ीराखट टोल गेट पर मंगलवार को सड़क हादसे में सात लोगों की मौत के बाद तनाव की स्थिति पैदा हो गई। हादसे के विरोध में स्थानीय लोगों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने टोल वसूली के खिलाफ प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय राजमार्ग के खराब हिस्सों की तत्काल मरम्मत की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने टोल गेट को बंद कर दिया और मांग की कि जब तक राष्ट्रीय राजमार्ग के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत पूरी नहीं हो जाती, तब तक टोल वसूली रोक दी जाए। प्रदर्शनकारियों का सवाल था कि जब राजमार्ग के कई हिस्से खराब स्थिति में हैं और लोगों के लिए दुर्घटना का खतरा बना हुआ है, तो वाहन चालकों से टोल क्यों वसूला जा रहा है।

टोल वसूली शुरू होने पर बढ़ा आक्रोश

प्रदर्शन के दौरान टोल वसूली कुछ समय के लिए बाधित रही। हालांकि, बाद में टोल गेट पर दोबारा वसूली शुरू कर दी गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया। उन्होंने टोल गेट के अधिकारियों और प्रशासन पर उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सड़क की खराब स्थिति को देखते हुए पहले उसकी मरम्मत की जानी चाहिए और उसके बाद ही टोल वसूली जारी रखी जानी चाहिए। उनका आरोप है कि खराब सड़क की वजह से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) की जोरहाट इकाई से जुड़े रिंकू डेका को प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर उकसाने के आरोप में हिरासत में ले लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, डेका की भूमिका और उन्हें हिरासत में लिए जाने की परिस्थितियों को लेकर पुलिस की जांच जारी है। पुलिस यह भी सुनिश्चित करने में जुटी है कि प्रदर्शन के दौरान स्थिति और अधिक न बिगड़े।

टोल गेट पर भारी पुलिस बल तैनात

प्रदर्शन और तनाव को देखते हुए सोनापुर के नज़ीराखट टोल गेट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। सुरक्षा बलों की मौजूदगी का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और प्रदर्शनकारियों तथा टोल कर्मचारियों के बीच किसी संभावित टकराव को रोकना था। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मुख्य मांग दोहराते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग के खराब हिस्सों की आवश्यक मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली बंद की जाए। सात लोगों की मौत वाले सड़क हादसे के बाद उठे इस विरोध ने एक बार फिर असम में राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति, सड़क सुरक्षा और टोल वसूली की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क के रखरखाव और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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