सोनम वांगचुक ने जोरमथांगा से मुलाकात कर शांति समझौता समझा


सोनम वांगचुक ने जोरमथांगा से मुलाकात कर शांति समझौता समझा
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आइजोल : सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री और मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के अध्यक्ष जोरमथांगा से नयी दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मिजोरम में हुए मिजो शांति समझौते का अध्ययन करने और शांति प्रक्रिया में जोरमथांगा के अनुभवों को समझने की इच्छा जताई। एमएनएफ की ओर से बुधवार को जारी एक बयान के मुताबिक, वांगचुक ने सोमवार को नयी दिल्ली स्थित मिजोरम हाउस में जोरमथांगा से करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच बैठक में राजनीति और समसामयिक मुद्दों के अलावा संघर्ष के समाधान, सुलह और मेल-मिलाप की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बयान के अनुसार, वांगचुक ने कहा कि वह मिजोरम के सफल समझौता ज्ञापन का अध्ययन करना चाहते हैं और जोरमथांगा के अनुभवों को बेहतर ढंग से समझना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जोरमथांगा ने मिजो शांति समझौते को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वांगचुक की इस इच्छा के संदर्भ में जोरमथांगा ने उन्हें मिजो शांति समझौते की पृष्ठभूमि और उसकी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस समझौते को टिकाऊ और सफल शांति समझौतों में से एक माना जाता है। बयान के मुताबिक, संघर्ष समाधान के क्षेत्र में अध्ययन करने वाले कई व्यक्ति और संगठन मिजो शांति प्रक्रिया में रुचि रखते हैं।

केंद्र की भूमिका और समझौते में भागीदारी पर चर्चा

जोरमथांगा ने वांगचुक को शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में केंद्र सरकार की भूमिका के बारे में भी बताया। उन्होंने विभिन्न पक्षों को बातचीत और समझौते की प्रक्रिया में शामिल करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। मिजोरम में लंबे समय तक चले उग्रवाद के बाद शांति स्थापित करने की प्रक्रिया में एमएनएफ की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। बयान में कहा गया कि जोरमथांगा ने उग्रवाद के दौर में एमएनएफ का नेतृत्व किया था और बाद में पार्टी के अध्यक्ष तथा मिजोरम के मुख्यमंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।

वांगचुक ने लद्दाख आने का दिया निमंत्रण

बैठक के दौरान वांगचुक ने जोरमथांगा को लद्दाख आने का निमंत्रण भी दिया। दोनों के बीच हुई बातचीत में शांति, सुलह और संघर्ष समाधान के अनुभवों को समझने तथा साझा करने पर विशेष रूप से चर्चा हुई।

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