असम में पेप्सिको की पहली फूड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू, 778 करोड़ का निवेश

नलबाड़ी प्लांट से 700 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार, 5,000 से अधिक किसानों को मिलेगा लाभ
असम में पेप्सिको की पहली फूड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू, 778 करोड़ का निवेश
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नलबाड़ी : पेप्सिको इंडिया ने असम के नलबाड़ी में अपनी पहली फूड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू कर दी है। 778 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित यह अत्याधुनिक प्लांट कंपनी के भारत में खाद्य विनिर्माण विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कंपनी के अनुसार, यह निवेश असम के कृषि क्षेत्र, स्थानीय विनिर्माण, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ उत्तर-पूर्व भारत में उसकी सप्लाई चेन को मजबूत करेगा। 44.2 एकड़ में फैली इस यूनिट का उद्घाटन असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने पेप्सिको इंडिया और दक्षिण एशिया के सीईओ जागृत कोटेचा तथा अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में किया। इस मौके पर राज्य के वित्त, पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ, खेल एवं युवा कल्याण तथा हथकरघा मंत्री बिस्वजीत दैमारी, तिहू विधानसभा क्षेत्र के विधायक चंद्र मोहन पटोवारी और बरखेत्री विधानसभा क्षेत्र के विधायक नारायण डेका समेत वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, किसान और स्थानीय समुदाय के लोग मौजूद रहे।


असम में पेप्सिको का पहला और देश में पांचवां प्लांट

नलबाड़ी की यह यूनिट असम में पेप्सिको इंडिया का पहला और भारत में कंपनी का पांचवां फूड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट है। यहां कंपनी के प्रमुख स्नैक ब्रांड लेज़ (Lay’s) और अंकल चिप्स (Uncle Chipps) का उत्पादन किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक, यह संयंत्र उत्तर-पूर्व भारत और पश्चिम बंगाल में उसके फूड मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना पेप्सिको की 2030 तक भारत में 5,700 करोड़ रुपये के निवेश की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। कंपनी का कहना है कि इसके जरिए मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और भारत को अपने प्रमुख ग्रोथ मार्केट के रूप में विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।


5,000 से ज्यादा किसानों को मिलेगा फायदा

नलबाड़ी प्लांट के शुरू होने से असम में चिप्स के लिए इस्तेमाल होने वाले चिप-ग्रेड आलू की मांग बढ़ेगी। कंपनी के अनुसार, इससे आने वाले वर्षों में 5,000 से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ करीब 60,000 टन कोल्ड स्टोरेज क्षमता की मांग भी पैदा होगी। पेप्सिको फिलहाल असम में 600 से अधिक किसानों के साथ काम कर रही है। कंपनी किसानों को बेहतर बीज, कृषि तकनीक, एग्रोनॉमी, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने के जरिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और सहयोगी कृषि व्यवस्था का विस्तार कर रही है।

700 रोजगार के अवसर, MSME को भी बढ़ावा

कंपनी के मुताबिक, नलबाड़ी यूनिट से करीब 700 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इसके अलावा स्थानीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग और अन्य सहायक उद्योगों के लिए भी नए कारोबारी अवसर पैदा होंगे। पेप्सिको ने प्लांट में महिला कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया है। कंपनी का लक्ष्य 75 प्रतिशत से अधिक महिला प्रतिनिधित्व वाली वर्कफोर्स तैयार करना है। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य स्थानीय महिलाओं, युवाओं और समुदायों के लिए रोजगार के सार्थक अवसर तैयार करना है।

मुख्यमंत्री ने बताया औद्योगिक विकास में अहम पड़ाव

मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि नलबाड़ी में पेप्सिको की फूड मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का उद्घाटन असम की औद्योगिक विकास यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि यह निवेश दर्शाता है कि बड़ी वैश्विक कंपनियों को राज्य की कारोबारी नीतियों, बुनियादी ढांचे और कुशल कार्यबल पर भरोसा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस परियोजना से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ राज्य का कृषि तंत्र भी मजबूत होगा। इससे किसानों, महिलाओं और स्थानीय उद्यमों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

'प्रगति की साझेदारी' को मिलेगा विस्तार

पेप्सिको इंडिया और दक्षिण एशिया के सीईओ जागृत कोटेचा ने कहा कि नलबाड़ी फैसिलिटी का उद्घाटन कंपनी की विकास यात्रा में अहम पड़ाव है। उन्होंने कहा कि असम का मजबूत कृषि आधार, बेहतर होता इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती आर्थिक अहमियत इसे कंपनी के विस्तार के अगले चरण के लिए स्वाभाविक विकल्प बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इस निवेश के जरिए कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के साथ किसानों, स्थानीय कारोबारों, महिलाओं, युवाओं और समुदायों तक पूरी वैल्यू चेन में सकारात्मक प्रभाव पैदा करने का प्रयास कर रही है।

सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

नलबाड़ी प्लांट को पेप्सिको की 'विनिंग विद पेप+' और पेप्सिको पॉजिटिव की अवधारणा के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें ऊर्जा और पानी के संरक्षण के लिए कई आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है। प्लांट में धान की भूसी आधारित बायोफ्यूल थर्मिक हीटर, सोलर पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, वॉटर रिकवरी सिस्टम और रेनवाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की गई है। फ्रायर से निकलने वाली भाप और VAM प्रक्रिया के माध्यम से पानी की रिकवरी की व्यवस्था भी की गई है। कंपनी के मुताबिक, प्लांट में इस्तेमाल होने वाले पानी की भरपाई की दिशा में भी काम किया जाएगा। इसके अलावा संयंत्र 'एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी' (EPR) की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है।

1.9 MWp तक सोलर क्षमता बढ़ाने की योजना

प्लांट में फिलहाल 1.2 MWp की ऑन-साइट सोलर रूफटॉप क्षमता स्थापित की जा चुकी है। कंपनी की योजना इसे बढ़ाकर कुल 1.9 MWp करने की है। इससे संयंत्र में अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल को और बढ़ावा मिलेगा। पेप्सिको ने परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए असम में दो इलेक्ट्रिक (EV) कंटेनर ट्रक भी शुरू किए हैं। प्लांट में इनके लिए चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया गया है। कंपनी के अनुसार, इससे सालाना करीब 1.20 लाख किलोमीटर तक के परिचालन में कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी। कंपनी का कहना है कि नलबाड़ी यूनिट केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली परियोजना नहीं है, बल्कि यह असम में कृषि, रोजगार, स्थानीय कारोबार और टिकाऊ औद्योगिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

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