APDCL के खिलाफ नाराजगी, बिजली कटौती और पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल

बिजली लाइनों के रखरखाव के नाम पर बड़े हिस्से में पेड़ काटने का आरोप
APDCL के खिलाफ नाराजगी, बिजली कटौती और पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल
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नॉर्थ लखीमपुर : असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (APDCL) के नॉर्थ लखीमपुर डिवीजन के कामकाज को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। निवासियों ने एक ओर जहां बिजली लाइनों के रखरखाव के दौरान कथित तौर पर पेड़ों की अनावश्यक कटाई का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय में बार-बार और लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायत की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली लाइनों के आसपास पेड़ों और उनकी शाखाओं को हटाना जरूरी होने पर भी कर्मचारियों को केवल उन टहनियों की छंटाई करनी चाहिए जो तारों के लिए खतरा पैदा करती हैं। आरोप है कि कई बार खतरनाक शाखाओं को चुनिंदा तरीके से हटाने के बजाय पेड़ों के बड़े हिस्से को ही काट दिया जाता है।

डीसी कार्यालय के पास दो पेड़ काटने पर विवाद

मंगलवार सुबह जिला कमिश्नर कार्यालय के पास स्थित **ASCARD बैंक परिसर** में दो पेड़ों को काटे जाने की घटना ने स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा। बताया गया कि ये लैबर्नम और कैसिया के पेड़ एक स्थानीय प्रकृति प्रेमी ने लगाए थे। निवासियों के मुताबिक, APDCL कर्मचारियों ने बिजली लाइन के रखरखाव के दौरान इन पेड़ों को काट दिया। खास बात यह है कि उस समय नॉर्थ लखीमपुर शहर में सोमवार रात से ही बिजली आपूर्ति बाधित थी। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने पेड़ों की कटाई के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिजली लाइन के लिए वास्तविक खतरा पैदा करने वाली शाखाओं की पहचान कर केवल उनकी छंटाई की जानी चाहिए थी। स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग, वन विभाग और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि पेड़ों की कटाई या छंटाई से पहले उचित प्रक्रिया और विशेषज्ञ सलाह का पालन किया जाना चाहिए।

बारिश और तेज हवाओं में बार-बार बिजली गुल

APDCL की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी उपभोक्ताओं ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। उनका आरोप है कि बारिश और तेज हवाओं के दौरान नॉर्थ लखीमपुर में बिजली आपूर्ति अक्सर बाधित हो जाती है। इसके अलावा तय और बिना सूचना वाली बिजली कटौती से भी लोग परेशान हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कुछ मामलों में बिजली कटौती की पूर्व सूचना नहीं दी जाती। लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से हजारों घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ आवश्यक सेवाओं और छोटे कारोबारों पर भी असर पड़ता है।

रविवार और छुट्टियों में शटडाउन पर भी सवाल

मरम्मत और रखरखाव के लिए किए जाने वाले कुछ बिजली शटडाउन को रविवार तथा सार्वजनिक अवकाश के दिनों में किए जाने पर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि छुट्टियों में लोग अधिक समय घर पर रहते हैं और उस दौरान घरेलू बिजली की जरूरत भी बढ़ जाती है। ऐसे में लंबे समय तक आपूर्ति बंद रहने से लोगों को अतिरिक्त परेशानी होती है। स्थानीय लोगों ने APDCL और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने तथा बार-बार होने वाले व्यवधान को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। निवासियों ने बिजली लाइनों के आसपास पेड़-पौधों के प्रबंधन के लिए अधिक वैज्ञानिक और चयनित तरीका अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली लाइनों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके लिए स्वस्थ पेड़ों को अनावश्यक रूप से नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। उन्होंने APDCL से नियोजित बिजली कटौती की पर्याप्त पूर्व सूचना देने, आपूर्ति व्यवस्था में सुधार करने और पेड़ों की छंटाई के दौरान संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर ही समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।

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