

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस की टोपी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के लाल किले में मौजूद नेताजी संग्रहालय से उनकी टोपी गायब हो गई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म “एक्स” पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग कर मामले की जांच का आग्रह किया है। चंद्र बोस का कहना है कि 23 जनवरी 2019 को नेताजी की टोपी को उन्होंने और उनके परिवार के सदस्यों ने प्रधानमंत्री मोदी को सौंपा था और उसे लाल किले के नेताजी संग्रहालय में कांच के बॉक्स में प्रदर्शित किया गया था। हाल ही में एक वकील ने संग्रहालय में जाकर देखा तो वह टोपी वहां नहीं मिली और कर्मचारियों के पास उसकी स्थिति के बारे में कोई संतोषजनक जानकारी नहीं थी।
ASI का स्पष्टीकरण
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने दिल्ली के लाल किले स्थित नेताजी संग्रहालय से नेताजी की ऐतिहासिक टोपी के गायब होने के आरोपों को खारिज कर दिया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि यह वस्तु सुरक्षित रूप से रखी गई है। हालाँकि, ASI ने बयान दिया कि टोपी गायब नहीं हुई है, बल्कि उसे हाल ही में पोर्ट ब्लेयर में एक प्रदर्शनी के लिए ले जाया गया था और तकनीकी कारणों से उसे फिर से प्रदर्शित नहीं किया गया था।
टोपी 'असली नहीं' का दावा
इस बीच बोस ने एक और दावा किया है कि संग्रहालय में जो टोपी प्रदर्शित की गई है, वह असली नहीं लगती है। उन्होंने कहा है कि जिन्होंने पहले टोपी को देखा था, उन्हें लगता है कि वर्तमान में जो टोपी रखी गयी है वह असली नहीं है और इस मामले की सही पहचान एवं उसका प्रमाणीकरण होना चाहिए।
केंद्र सरकार से जांच की अपील
बोस ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय महत्व का करार देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय और सरकार से स्पष्ट बयान देने और उचित जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि अगर ऐतिहासिक वस्तु खो गई है तो यह एक गंभीर मामला है, जिस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। यह पहली बार नहीं है जब ऐसी स्थिति पैदा हुई है। 2021 में भी एक ऐसा ही भ्रम तब उत्पन्न हुआ था जब टोपी को कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल को अस्थायी रूप से सौंपा गया था।