

गुवाहाटी : असम की नगांव लोकसभा सीट पर 6 अक्टूबर को होने वाला उपचुनाव अब चार प्रमुख उम्मीदवारों के मैदान में उतरने के साथ बहुकोणीय मुकाबले का रूप ले चुका है। भाजपा ने हाल ही में सेवानिवृत्त हुए पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा, कांग्रेस ने पूर्व बटद्रवा विधायक सिबामोनी बोरा, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) ने पार्टी प्रमुख और बिन्नाकांडी विधायक बदरुद्दीन अजमल, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने ढिंग कॉलेज के सेवानिवृत्त वाइस-प्रिंसिपल अब्दुल सलाम को उम्मीदवार बनाया है। मतदान 6 अक्टूबर को और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। यह उपचुनाव इस साल अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद असम में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के लिए पहला बड़ा चुनावी मुकाबला है। नगांव सीट मार्च में उस समय खाली हुई थी, जब तत्कालीन कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। बाद में उन्होंने विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर दिसपुर सीट से जीत दर्ज की।
पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा भाजपा उम्मीदवार
भाजपा के उम्मीदवार देबाशीष शर्मा हाल तक नगांव के उपायुक्त थे। उन्होंने 3 सितंबर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली और पांच दिन बाद, 8 सितंबर को भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद पार्टी ने उन्हें नगांव लोकसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किया। उन्होंने बुधवार को अपना नामांकन भी दाखिल किया। शर्मा 1992 में असम सिविल सर्विस में शामिल हुए थे और बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नत हुए। वह नगांव के अलावा पड़ोसी मोरीगांव जिले के उपायुक्त भी रह चुके हैं। प्रशासनिक सेवा के दौरान कैंसर मरीजों की सहायता से जुड़े उनके सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख किया जाता रहा है। शर्मा ने अपनी उम्मीदवारी के बाद अपनी प्रशासनिक पृष्ठभूमि और नगांव-मोरीगांव में लोगों से संपर्क को अपनी ताकत के तौर पर बताया। हालांकि, कांग्रेस ने उनके हालिया प्रशासनिक कार्यकाल और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े संभावित हितों के टकराव को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस ने पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा पर जताया भरोसा
कांग्रेस ने 63 वर्षीय सिबामोनी बोरा को उम्मीदवार बनाया है। वह नगांव जिले की पूर्व बटद्रवा विधायक हैं और 2021 में विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं। 2023 के परिसीमन के बाद बटद्रवा विधानसभा सीट के पुनर्गठन के कारण उन्होंने 2026 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा। बोरा का परिवार भी असम की राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके पति किरण बोरा बटद्रवा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वह असम के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री गोलाप बोरबोरा के परिवार से भी जुड़ी हैं। बोरा ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को लेकर आत्मविश्वास जताया है और कहा है कि कांग्रेस नगांव में अपने संगठन और जनाधार के आधार पर चुनाव लड़ेगी।
बदरुद्दीन अजमल की एंट्री से मुकाबला बदला
AIUDF ने अंतिम समय में पार्टी प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को उम्मीदवार बनाकर चुनावी मुकाबले में नया आयाम जोड़ा। 70 वर्षीय अजमल वर्तमान में बिन्नाकांडी से विधायक हैं और इससे पहले धुबरी लोकसभा सीट से तीन बार सांसद रह चुके हैं। AIUDF की स्थापना अजमल ने 2005 में की थी। पार्टी ने इसके बाद असम विधानसभा और लोकसभा चुनावों में सीटें जीतीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव और 2026 के विधानसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन पहले की तुलना में सीमित रहा। अजमल अब नगांव से लोकसभा में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। अजमल ने अपने प्रचार में भाजपा और कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते हुए AIUDF को इंसानियत और सामाजिक मुद्दों से जोड़कर पेश किया है।
TMC के अब्दुल सलाम भी मैदान में
चौथे प्रमुख उम्मीदवार अब्दुल सलाम हैं, जिन्हें तृणमूल कांग्रेस ने टिकट दिया है। सलाम ढिंग कॉलेज में प्रोफेसर और सेवानिवृत्त वाइस-प्रिंसिपल हैं। उनके जरिए TMC नगांव क्षेत्र में अपने राजनीतिक आधार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है। TMC विधायक शेरमन अली अहमद ने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को चुनाव का प्रमुख मुद्दा बताते हुए सलाम की उम्मीदवारी के समर्थन में प्रचार किया है।
सात दशकों में कई बार बदला राजनीतिक समीकरण
मध्य असम में स्थित नगांव असम की 14 लोकसभा सीटों में से एक है। पिछले सात दशकों में यहां मतदाताओं का समर्थन अलग-अलग दलों को मिलता रहा है। लंबे समय तक यह कांग्रेस का मजबूत क्षेत्र रहा। 1985 के बाद कुछ चुनावों में असम गण परिषद (AGP) ने भी यहां जीत दर्ज की। इसके बाद भाजपा ने भी लगातार चुनावी सफलता हासिल की। 2019 में कांग्रेस के प्रद्युत बोरदोलोई ने भाजपा के कब्जे से सीट वापस ली और 2024 में भी जीत बरकरार रखी। हालांकि, उनके भाजपा में शामिल होने के बाद सीट खाली हुई और उपचुनाव की स्थिति बनी।
परिसीमन के बाद बदली सीट की संरचना
2023 के परिसीमन के बाद नगांव लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें शामिल हैं। इनमें तीन मोरीगांव जिले और पांच नगांव जिले में हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में इन आठ सीटों में भाजपा ने चार, कांग्रेस ने तीन और राइजर दल ने एक सीट जीती थी। परिसीमन के बाद नगांव लोकसभा क्षेत्र की सामाजिक और चुनावी संरचना में भी बदलाव आया है। विभिन्न रिपोर्टों में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 55-58 प्रतिशत बताई गई है। ऐसे में अलग-अलग दलों के उम्मीदवारों की रणनीति और सामाजिक समीकरण उपचुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, किसी समुदाय के मतदाता एकसमान राजनीतिक पसंद रखते हैं, ऐसा मानना उचित नहीं होगा। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उम्मीदवारों के सामने क्षेत्र के विकास, रोजगार, बाढ़, सड़क-संपर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य स्थानीय मुद्दों को लेकर मतदाताओं तक पहुंचने की चुनौती होगी। फिलहाल चारों प्रमुख उम्मीदवारों ने नामांकन के दौरान समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन कर चुनाव प्रचार की औपचारिक शुरुआत कर दी है।