

निउलैंड : नागालैंड में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रोडिगल्स होम, जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) निउलैंड और जिला प्रशासन निउलैंड के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को बाल सुरक्षा एवं संरक्षण पर परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में निउलैंड समुदाय के सदस्यों, पुलिसकर्मियों, चर्च समिति के सदस्यों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए समुदाय, प्रशासन, पुलिस और अन्य संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय उनकी शिकायतों पर कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाना जरूरी है।
बाल सुरक्षा पर चर्चा अभी भी संवेदनशील विषय : डीसी
निउलैंड के उपायुक्त टीएल कियुसुमोंग तिखिर ने कहा कि नागालैंड में बाल सुरक्षा पर चर्चा के मामले में अभी काफी काम किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि राज्य में यह विषय कई बार अपरिचित और संवेदनशील माना जाता है। उन्होंने विशेष रूप से समाज में प्रचलित ‘माफ करो और भूल जाओ’ की सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि कई मामलों में इसी प्रक्रिया के दौरान पीड़ितों को न्याय से वंचित कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसमें भूमिका निभानी होगी। तिखिर ने पोक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और श्रम कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कई कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
उन्होंने बताया कि पोक्सो अधिनियम की धारा 2(डी) और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 2(12) में 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को बच्चा माना गया है। उन्होंने कहा कि बच्चे समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों में हैं और उन्हें हर संभव सहायता एवं संरक्षण की आवश्यकता है।
रिपोर्ट नहीं होने वाले मामलों पर चिंता
उपायुक्त ने कहा कि कानूनी प्रावधानों के बावजूद बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले सामने आ रहे हैं और जो मामले सामने आते हैं, वे संभवतः पूरी तस्वीर का केवल एक हिस्सा हैं। उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हेल्पलाइन पर प्रतिदिन करीब 26 कॉल आती हैं, जिनमें लगभग 13 कॉल नागालैंड से होने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि कई मामले अब भी रिपोर्ट नहीं होते या सामाजिक दबाव के कारण दबा दिए जाते हैं। ऐसे में लोगों के बीच बाल सुरक्षा को लेकर जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाना जरूरी है।
बाल अपराध पूरे समाज के खिलाफ अपराध : तिखिर
तिखिर ने कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराध केवल किसी एक बच्चे के खिलाफ अपराध नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज और राज्य को प्रभावित करते हैं। उन्होंने नागा समाज से अपील की कि बच्चों से जुड़े मामलों में केवल क्षमा की भावना पर जोर देने के बजाय न्याय और ईमानदारी जैसे मूल्यों को भी महत्व दिया जाए।
बाल सुरक्षा के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा
कार्यक्रम के अगले सत्र में प्रोडिगल्स होम की पीडी लोजुआ कापे और के. सैनी ने क्रमश: ‘नागालैंड में बच्चों की समग्र सुरक्षा एवं संरक्षण सुनिश्चित करना’ और ‘बाल सुरक्षा दिशानिर्देश’ विषय पर प्रस्तुति दी। लोजुआ कापे ने राज्य में बच्चों के खिलाफ सामने आए वास्तविक मामलों का उल्लेख करते हुए समाज की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने लोगों से यह सोचने का आग्रह किया कि नागालैंड के युवाओं के सामने समाज किस तरह का उदाहरण पेश कर रहा है। उन्होंने लोगों से जरूरतमंद बच्चों की ‘आंख, कान, हाथ और पैर’ बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों की मदद के लिए केवल बातें करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार और कार्यों के जरिए भी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर
कार्यक्रम की शुरुआत चाइल्ड हेल्पलाइन निउलैंड की काउंसलर तोकावी के स्वागत संबोधन से हुई। होजुखे घामी बैपटिस्ट अकुकुहौ की चिल्ड्रेन पास्टर टेरेसा सेमा ने प्रार्थना की। निउलैंड की जिला बाल संरक्षण अधिकारी कुघाकाली अचुमो ने कार्यक्रम का परिचय देते हुए बाल सुरक्षा एवं संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपायों और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता की आवश्यकता पर चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में बच्चों की सुरक्षा को केवल प्रशासन या कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय न मानकर समाज की सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि जागरूकता, जवाबदेही और समय पर कार्रवाई के जरिए ही बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सकता है।