नागालैंड हाउस में प्रोफेसरों से कथित दुर्व्यवहार, निष्पक्ष जांच की मांग


नागालैंड हाउस में प्रोफेसरों से कथित दुर्व्यवहार, निष्पक्ष जांच की मांग
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नागालैंड-गुवाहाटी : नई दिल्ली के आरके पुरम स्थित नागालैंड हाउस में प्रोफेसर डॉली किकॉन और प्रोफेसर संजय बारबोरा के साथ कथित दुर्व्यवहार और डराने-धमकाने के मामले में 30 से अधिक शिक्षाविदों, पत्रकारों, शोधकर्ताओं, लेखकों, कलाकारों और नागरिकों ने नागालैंड सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने दोनों शिक्षाविदों से बिना शर्त माफी मांगने और जांच के निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई करने की अपील की है। यह घटना 15 सितंबर को नागालैंड हाउस में आयोजित एक अकादमिक कार्यक्रम के बाद हुई। कार्यक्रम का आयोजन नागा स्कॉलर्स एसोसिएशन (NSA) ने किया था। इसमें प्रोफेसर डॉली किकॉन को उनकी डॉक्यूमेंट्री ‘A Sacred Place’ की स्क्रीनिंग और छात्रों एवं शोधार्थियों के साथ संवाद के लिए आमंत्रित किया गया था। फिल्म की स्क्रीनिंग नागालैंड हाउस के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुई, जिसके बाद फिल्म निर्माता के साथ चर्चा भी हुई।

कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ विवाद

संयुक्त बयान के अनुसार, कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कुछ छात्र और शोधार्थी रिसेप्शन क्षेत्र के पास डॉली किकॉन के साथ बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान नागालैंड हाउस के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर वहां मौजूद लोगों को वहां से चले जाने के लिए कहा। हस्ताक्षरकर्ताओं का आरोप है कि प्रोफेसर संजय बारबोरा ने लोगों को वहां से हटाने के तरीके पर आपत्ति जताई। इसके बाद कर्मचारी कथित तौर पर उनके साथ उलझ गया और उन्हें शारीरिक झड़प की चुनौती दी। बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि नागालैंड हाउस के मैनेजर ने स्थिति को शांत करने के बजाय संबंधित कर्मचारी के व्यवहार का बचाव किया। डॉली किकॉन ने भी 16 सितंबर को जारी अपने बयान में घटना को अपमानजनक अनुभव बताया था। उनके अनुसार, वह छात्रों से बातचीत कर रही थीं, तभी रिसेप्शन पर मौजूद कर्मचारी ने कथित तौर पर उन्हें वहां से जाने को कहा। उन्होंने बताया कि बारबोरा ने कर्मचारी के व्यवहार पर आपत्ति जताई, जिसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

आमंत्रित अतिथि को भी जाने के लिए कहा : आरोप

हस्ताक्षरकर्ताओं के मुताबिक, किकॉन ने कर्मचारियों को बताया कि वह नागा स्कॉलर्स एसोसिएशन की आमंत्रित वक्ता थीं और छात्र अभी उनसे बातचीत कर रहे थे। इसके बावजूद कथित तौर पर उन्हें भी वहां से चले जाने के लिए कहा गया। बयान में दावा किया गया कि वहां चल रही बातचीत को ‘न्यूजेंस’ और ‘डिसरप्शन’ बताया गया। हालांकि, घटना के संबंध में नागालैंड हाउस के जनसंपर्क अधिकारी कुओली मेरे ने कहा कि वह घटना की शुरुआत के समय वहां मौजूद नहीं थे और बाद में मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और डॉली किकॉन तथा उनके पति से माफी मांगे जाने की बात कही। उन्होंने यह भी माना कि नागालैंड हाउस में आने वाले लोगों के साथ कर्मचारियों के व्यवहार की समीक्षा की आवश्यकता है।

सार्वजनिक संस्थान में सम्मानजनक व्यवहार की मांग

संयुक्त बयान जारी करने वाले शिक्षाविदों और अन्य लोगों ने कहा कि नागालैंड हाउस राष्ट्रीय राजधानी में नागालैंड सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाला सार्वजनिक संस्थान है। इसलिए वहां छात्रों, शोधकर्ताओं, आमंत्रित अतिथियों और आम लोगों के साथ सम्मानजनक और पेशेवर व्यवहार होना चाहिए। बयान में पूर्वोत्तर में जातीय और भाषाई पहचान के आधार पर कथित पूर्वाग्रह और शत्रुतापूर्ण व्यवहार को लेकर भी चिंता जताई गई। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले सार्वजनिक संस्थानों को जातीयता, भाषा या मूल स्थान से अलग सभी लोगों के साथ समान व्यवहार और गरिमा सुनिश्चित करनी चाहिए।

निष्पक्ष जांच और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की मांग

शिक्षाविदों ने नागालैंड सरकार से मामले का तत्काल संज्ञान लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों के आचरण की पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने जांच के निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई और किकॉन तथा बारबोरा से बिना शर्त माफी की मांग भी की है। इसके अलावा नागालैंड हाउस के कर्मचारियों, विशेषकर आम लोगों और अतिथियों से सीधे संपर्क में रहने वाले कर्मचारियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण की मांग की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने पेशेवर व्यवहार, शिष्टाचार और सम्मानजनक संवाद को आवश्यक बताया है। वहीं, प्रोफेसर बारबोरा ने एक स्थानीय रिपोर्ट में कहा कि वह और किकॉन घटना को आगे नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन उन्होंने माना कि इससे उन्हें खराब अनुभव हुआ। उन्होंने इस तरह के मामलों को नागालैंड हाउस प्रशासन द्वारा कर्मचारियों के प्रशिक्षण और पेशेवर आचरण के स्तर पर देखने की जरूरत बताई।

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