म्यांमार से अरुणाचल के रास्ते असम में ड्रग्स तस्करी का नया रूट, हिमंत ने जताई चिंता

हाल में 80 करोड़ की ड्रग्स जब्त
म्यांमार से अरुणाचल के रास्ते असम में ड्रग्स तस्करी का नया रूट, हिमंत ने जताई चिंता
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गुवाहाटी । असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने म्यांमार से अरुणाचल प्रदेश के रास्ते असम में नशीले पदार्थों की तस्करी के एक नए मार्ग के सामने आने पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि म्यांमार के चांगलांग जिले से होते हुए असम के तिनसुकिया तक ड्रग्स पहुंचाने का नया रूट ऊपरी असम के लिए “बहुत चिंताजनक संकेत” है।

मोरेह के बाद चांगलांग नया रूट

मीडिया से बातचीत में सरमा ने कहा कि पहले म्यांमार से ड्रग्स की तस्करी मुख्य रूप से मणिपुर के मोरेह के रास्ते होती थी। अब तस्करों ने अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले से होकर तिनसुकिया तक पहुंचने वाला नया मार्ग तलाश लिया है। हाल में गिरफ्तार किए गए ड्रग तस्करों से पूछताछ के दौरान इस नए नेटवर्क और रूट की जानकारी सामने आई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नए रास्ते पर लगातार सख्ती बरतने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि राज्य में नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है और हाल के सप्ताहों में बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त की गई है।

पंजाब भेजी जानी थी 80 करोड़ की ड्रग्स

सरमा के मुताबिक, हाल में असम में करीब 80 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स जब्त की गई है। उन्होंने कहा कि यह खेप पंजाब भेजे जाने वाली थी और विभाग द्वारा जब्त की गई बड़ी खेपों में से एक है। मुख्यमंत्री ने ड्रग्स के बढ़ते खतरे को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि राज्य सरकार इस नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी।

‘रास्ते बदल सकते हैं, हमारा संकल्प नहीं’

सरमा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लगातार कार्रवाई से घबराकर माफिया अब म्यांमार से अरुणाचल प्रदेश होते हुए नए रास्ते आजमा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तस्कर चाहे रास्ते बदलें, लेकिन सरकार का संकल्प नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा कि हर ड्रग नेटवर्क का पता लगाकर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

चांगलांग पर बढ़ी निगरानी

एक अधिकारी के अनुसार, म्यांमार में तैयार होने वाली ड्रग्स को सीमा से लगे इलाकों के जरिए भारत में लाने की कोशिश की जाती रही है। अरुणाचल प्रदेश की म्यांमार से सीमा लगने के कारण चांगलांग तस्करी के संभावित मार्गों में शामिल हो गया है। हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश सरकार ने भी अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज किया है और कई संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया है।

गोल्डन ट्राएंगल से जुड़ा ड्रग नेटवर्क

म्यांमार लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय अवैध ड्रग व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। थाईलैंड, म्यांमार और लाओस की सीमा से जुड़ा गोल्डन ट्राएंगल ऐतिहासिक रूप से अफीम और हेरोइन उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में रहा है। पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति और म्यांमार से लगती सीमाएं इसे ड्रग तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण क्षेत्र बनाती हैं।

स्टिलवेल रोड को लेकर भी चिंता

असम, म्यांमार और चीन को जोड़ने वाली ऐतिहासिक स्टिलवेल रोड को लेकर भी लंबे समय से सीमा पार अवैध गतिविधियों की आशंका जताई जाती रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, दूरदराज और दुर्गम इलाकों से गुजरने वाले मार्गों का इस्तेमाल अतीत में ड्रग तस्करी समेत अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए किए जाने की आशंका रही है। नए ड्रग रूट के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने सीमा क्षेत्र में निगरानी और मजबूत करने की चुनौती बढ़ गई है।

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