

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल से आग्रह किया है कि वे भारत सरकार को संसद के अधिनियम के माध्यम से द्वीपसमूह में पूर्ण केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की सिफारिश करें, न कि प्रस्तावित “डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी” मॉडल को आगे बढ़ाया जाए। हालही में उपराज्यपाल को सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन में सांसद ने कहा कि उन्होंने इससे पहले 9 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री के समक्ष यह मामला उठाया था तथा 12 फरवरी 2026 को पुनः स्मरण पत्र भी भेजा था। उन्होंने फरवरी 2026 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री से हुई बैठक के दौरान भी द्वीपसमूह में केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रबल जन मांग से अवगत कराया था। सांसद ने कहा कि सरकार द्वारा द्वीपसमूह के सभी सात महाविद्यालयों को डीम्ड यूनिवर्सिटी ढांचे के अंतर्गत लाने के प्रस्ताव से छात्रों, अभिभावकों एवं अन्य हितधारकों के बीच व्यापक चिंता और असंतोष उत्पन्न हुआ है। इस मांग के समर्थन में 1 से 20 फरवरी 2026 के बीच जेएनआरएम परिसर, श्री विजयापुरम तथा महात्मा गांधी कॉलेज, मायाबंदर सहित विभिन्न स्थानों पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन आयोजित किए गए। केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग को लेकर 16 फरवरी 2026 को अंडमान बंद भी रखा गया था। बिष्णु पद रे ने आगे कहा कि 20 से 25 फरवरी 2026 के दौरान विभिन्न महाविद्यालयों के दौरे में उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत की, जिन्होंने सर्वसम्मति से संसद के अधिनियम के माध्यम से केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग की। सांसद ने कहा कि उन्होंने 16 मार्च 2026 को पुनः प्रधानमंत्री के समक्ष यह मुद्दा उठाया तथा 23 मार्च 2026 को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान भी द्वीपसमूह में हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की तर्ज पर केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग रखी। उन्होंने 24 मार्च 2026 को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के सचिव डॉ. जोशी से भी मुलाकात कर उन्हें मामले से अवगत कराया। सांसद ने यह भी कहा कि उन्होंने 16 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय गृह मंत्री को भी पत्र भेजा था, जिसकी प्रतिलिपि शिक्षा मंत्री एवं उपराज्यपाल को भेजी गई थी। बाद में उन्हें 16 अप्रैल 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री की ओर से पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें बताया गया कि मामले को उचित कार्रवाई हेतु संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया है। हालांकि बिष्णु पद रे ने चिंता व्यक्त की कि केंद्र सरकार को केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा भेजी गई रिपोर्टों में द्वीपवासियों की वास्तविक आकांक्षाओं तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय की मजबूत मांग को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं किया गया है।
इसलिए सांसद ने उपराज्यपाल से आग्रह किया कि वे मामले की सहानुभूतिपूर्वक पुनः समीक्षा करें तथा डीम्ड यूनिवर्सिटी प्रस्ताव के स्थान पर संसद के अधिनियम के माध्यम से केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की सिफारिश करते हुए भारत सरकार को व्यापक प्रस्ताव भेजें, ताकि द्वीपसमूह के छात्रों एवं लोगों की शैक्षिक आकांक्षाओं तथा भविष्य के हितों की रक्षा हो सके। बिष्णु पद रे ने आशा व्यक्त की कि अंडमान एवं निकोबार प्रशासन द्वीपसमूह के उच्च शिक्षा भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।