मिजोरम ने असम, मेघालय को भेजा मूगा रेशमकीट बीज

मिजोरम ने असम, मेघालय को भेजा मूगा रेशमकीट बीज
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आइजोल : मिजोरम ने पूर्वोत्तर में रेशम उत्पादन और सेरीकल्चर गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पड़ोसी राज्यों असम और मेघालय को मूगा रेशमकीट के बीज भेजना शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, मिजोरम से करीब 27,000 रेशमकीटों की खेप बुधवार को असम के नारायणपुर और मेघालय के रोमपारा के लिए रवाना की गई। सेरीकल्चर निदेशक लालरिनावमा ने बीज की खेप को रवाना किया। अधिकारियों ने बताया कि इन रेशमकीट बीजों का इस्तेमाल दोनों राज्यों में आगे बड़े पैमाने पर बीज तैयार करने के लिए किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में मूगा रेशम उत्पादन की गतिविधियों को मजबूत करना और अनुकूल जलवायु वाले क्षेत्रों के संसाधनों का दूसरे राज्यों में भी उपयोग करना है।

मिजोरम की अनुकूल जलवायु से मिलेगा लाभ

अधिकारियों के मुताबिक गर्मियों के दौरान मैदानी इलाकों में मूगा रेशमकीटों का पालन करना चुनौतीपूर्ण होता है। अत्यधिक गर्मी के कारण इनका पालन और बीज तैयार करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके विपरीत, मिजोरम की जलवायु गर्मियों के मौसम में भी मूगा रेशमकीट पालन के लिए अनुकूल मानी जाती है। इसी वजह से मिजोरम में तैयार किए गए मूगा रेशमकीट बीज को असम और मेघालय भेजने की पहल की गई है। इससे इन राज्यों में अनुकूल समय पर मूगा पालन के लिए आवश्यक बीज की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

पूर्वोत्तर में रेशम उत्पादन को बढ़ावा

मूगा रेशम पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक रेशम उत्पादन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। असम में मूगा पालन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है और राज्य के सेरीकल्चर विभाग के अनुसार गुणवत्तापूर्ण रेशमकीट बीज की समय पर उपलब्धता व्यावसायिक मूगा उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है। विभाग ने बीज को रेशम उद्योग की बुनियादी जरूरत बताया है। केंद्रीय रेशम बोर्ड के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण मूगा और एरी रेशमकीट बीज की जरूरत पूरी करने के लिए गुवाहाटी स्थित मूगा सिल्कवर्म सीड ऑर्गनाइजेशन विभिन्न मूगा एवं एरी उत्पादक राज्यों के सेरीकल्चर विभागों को बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था से जुड़ा है।

पारंपरिक बुनाई को भी मिलेगा समर्थन

मिजोरम से असम और मेघालय को मूगा बीज की आपूर्ति से क्षेत्र में रेशम उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों और रेशमकीट पालकों को बीज की उपलब्धता में मदद मिल सकती है और पूर्वोत्तर की पारंपरिक बुनाई तथा रेशम आधारित आजीविका को भी समर्थन मिल सकता है। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब मिजोरम सरकार अपने सेरीकल्चर क्षेत्र को विस्तार देने पर जोर दे रही है। हाल में मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने राज्य के सेरीकल्चर विभाग की समीक्षा करते हुए रेशम उत्पादन की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने और क्षेत्र के विकास के लिए व्यापक परियोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे।

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