

शिलांग : पिछले चार वर्षों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के दल बदलने के मामले में मेघालय पूर्वोत्तर में नागालैंड के बाद प्रमुख राज्यों में शामिल रहा है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से 2026 के बीच मेघालय के छह सांसद-विधायकों ने पार्टी बदली, जिससे राज्य देशभर में सातवें स्थान पर रहा। हालांकि, रिपोर्ट में सितंबर 2026 में आठ UDP विधायकों के BJP में शामिल होने की हालिया घटना को शामिल नहीं किया गया है।
देश में 111 सांसद-विधायकों ने बदली पार्टी
ADR के अनुसार, इस अवधि में देशभर में कुल 111 निर्वाचित सांसदों और विधायकों ने अपना राजनीतिक दल बदला। इनमें 26 लोकसभा सांसद, सात राज्यसभा सांसद और 78 विधायक शामिल हैं। नागालैंड 32 दल-बदल के साथ सबसे ऊपर रहा। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 20, तेलंगाना में नौ, जबकि गोवा और पंजाब में आठ-आठ मामले दर्ज किए गए। महाराष्ट्र और मेघालय में छह-छह जनप्रतिनिधियों ने दल बदला।
मेघालय के छह विधायक दल बदलने वालों में
रिपोर्ट के मुताबिक, मेघालय से छह विधायक दल बदलने वाले जनप्रतिनिधियों में शामिल थे। इस आंकड़े के आधार पर राज्य देश में सातवें स्थान पर रहा। मणिपुर में पांच और अरुणाचल प्रदेश में भी दल-बदल के मामले सामने आए, जिससे पूर्वोत्तर के कई राज्यों में चुनाव के बाद राजनीतिक पुनर्संयोजन की तस्वीर सामने आती है। हालांकि, मेघालय की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह आंकड़ा अब बदल चुका है। 23 सितंबर 2026 को UDP के आठ विधायक BJP में शामिल हुए, जिसके बाद 60 सदस्यीय विधानसभा में BJP की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई और UDP के पास चार विधायक रह गए।
आठ UDP विधायकों के जाने से बदला समीकरण
आठ विधायकों के BJP में शामिल होने से मेघालय विधानसभा में सत्ता पक्ष के भीतर राजनीतिक समीकरण बदले हैं। BJP और UDP दोनों मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाले मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (MDA) का हिस्सा हैं। इस बदलाव के बाद BJP विधानसभा में NPP के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। हालिया घटनाक्रम ADR के उस आंकड़े से अलग है, क्योंकि रिपोर्ट तैयार किए जाने के समय तक इन आठ विधायकों का दल परिवर्तन उसके आंकड़ों में शामिल नहीं था। इसलिए मेघालय में मौजूदा दल-बदल की संख्या ADR की प्रकाशित छह की संख्या से अधिक हो चुकी है।
NDPP से सबसे ज्यादा प्रतिनिधियों ने छोड़ी पार्टी
पार्टियों के लिहाज से नागालैंड की Nationalist Democratic Progressive Party (NDPP) से सबसे अधिक 25 निर्वाचित प्रतिनिधियों ने दल बदला। इसके बाद AITC के 20 और कांग्रेस के 19 सांसद-विधायक दूसरे दलों में गए। इन तीन दलों से जुड़े मामलों की संख्या कुल दल-बदल का करीब 58 प्रतिशत रही। ADR ने राजनीतिक दल-बदल पर चिंता जताते हुए मौजूदा दलबदल विरोधी व्यवस्था में बदलाव की जरूरत भी बताई है। रिपोर्ट में दल बदलने वाले नेताओं को तत्काल सार्वजनिक पद दिए जाने पर रोक और अयोग्यता से जुड़े मामलों में अधिक स्वतंत्र व्यवस्था जैसे सुझाव दिए गए हैं।