

शिलांग : मेघालय के एडवोकेट जनरल अमित कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर राज्यभर के वकीलों ने बुधवार को शिलांग में विरोध मार्च निकाला। वकीलों का आरोप है कि सरकार को उनकी शिकायतों और मांगों पर निर्णय लेने के लिए दो सप्ताह का समय दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। इसके बाद वकीलों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया। यह विरोध प्रदर्शन शिलांग हाई कोर्ट बार एसोसिएशन और शिलांग बार एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित किया गया। इसमें राज्य के विभिन्न जिलों की बार एसोसिएशनों से जुड़े वकीलों ने भी हिस्सा लिया। मार्च सिविल हॉस्पिटल इलाके में कियांग नांगबाह मेमोरियल के पास से शुरू हुआ और हाई कोर्ट की ओर बढ़ने के बाद वापस लौटा। प्रदर्शन के दौरान वकीलों के हाथों में मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा और राज्य सरकार की आलोचना करने वाले पोस्टर थे। प्रदर्शनकारियों ने “अमित कुमार वापस जाओ” जैसे नारे भी लगाए। वकीलों ने कहा कि सरकार की ओर से उनकी मांग पर स्पष्ट निर्णय नहीं आने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आश्वासन के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
वकील किशोर गौतम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार के साथ कई दौर की बैठकों और मिले आश्वासनों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के साथ हुई पिछली बैठक में वकीलों को कथित तौर पर आश्वासन दिया गया था कि अमित कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों और वकीलों की शिकायतों की जांच पूरी होने तक वह हाई कोर्ट, अन्य अदालतों या ट्रिब्यूनल के समक्ष राज्य सरकार की ओर से पेश नहीं होंगे। गौतम का आरोप है कि इस आश्वासन के बाद भी अमित कुमार अदालतों में पेश होते रहे। इससे बार के सदस्यों में असंतोष दोबारा बढ़ गया। उन्होंने बताया कि वकीलों ने कथित तौर पर कुमार के अदालत में पेश होने की जानकारी मुख्यमंत्री को फोन मैसेज और व्हाट्सएप के जरिए दी थी। उनका कहना है कि वकीलों को ऐसी किसी भी घटना की जानकारी सरकार को देने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा कि इसके बाद वकीलों को मुख्यमंत्री के साथ एक और बैठक होने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
1 अक्टूबर से न्यायिक कामकाज से दूरी
वकील पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वे 1 अक्टूबर से पूरे मेघालय में न्यायिक कार्यों से दूर रहेंगे। हालांकि, जमानत और अन्य जरूरी मामलों को इस विरोध से अलग रखा गया है। प्रदर्शनकारी वकीलों का आरोप है कि सरकार के आश्वासन के बावजूद एडवोकेट जनरल राज्य की ओर से अदालतों में पेश होते रहे। गौतम ने सवाल उठाया कि एडवोकेट जनरल को हटाने की मांग को लेकर बार की ओर से बार-बार अपील, बैठक और अनुरोध किए जाने के बावजूद सरकार इस मामले में निर्णय क्यों नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि जिला बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों की शिलांग में मौजूदगी इस बात का संकेत है कि यह केवल राजधानी के वकीलों का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राज्य के कई हिस्सों के अधिवक्ता इस मांग के समर्थन में हैं।
बार एसोसिएशन के भीतर भी मतभेद
इस विवाद के बीच मेघालय हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष के.एस. किनजिंग ने सचिव की ओर से लिए गए कुछ एकतरफा फैसलों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने अदालत के बहिष्कार की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, आंदोलन कर रहे वकीलों का कहना है कि सरकार की ओर से उनकी मांग पर स्पष्ट और संतोषजनक जवाब मिलने तक विरोध अलग-अलग रूपों में जारी रहेगा। वकीलों के अनुसार, आगे की रणनीति तय करने के लिए संबंधित बार एसोसिएशनें बैठक करेंगी। इस बीच, एडवोकेट जनरल को हटाने की मांग को लेकर जारी विवाद ने मेघालय में सरकार और कानूनी समुदाय के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम और बार एसोसिएशनों की आगामी बैठकों पर टिकी हैं।