

शिलांग : मेघालय विधानसभा ने बुधवार को राज्य में यूरेनियम के खनन और उसके प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा की ओर से सदन में पेश किए गए प्रस्ताव का विपक्ष ने भी समर्थन किया। प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से मेघालय में यूरेनियम के उत्खनन, खनन और उससे जुड़ी प्रसंस्करण गतिविधियों को आगे नहीं बढ़ाने की अपील की गई है। मुख्यमंत्री संगमा ने सदन में कहा कि यह प्रस्ताव राज्य की ओर से यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण के खिलाफ आधिकारिक और स्पष्ट रुख को दर्ज करता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के फैसले से केंद्र सरकार को मेघालय की स्थिति से अवगत कराया जाएगा। राज्य सरकार इस फैसले के बाद यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी कि राज्य में यूरेनियम से जुड़ी ऐसी गतिविधियां शुरू न हों।
स्वास्थ्य, पर्यावरण और विस्थापन की चिंता
मेघालय में यूरेनियम खनन का मुद्दा पिछले कई दशकों से विवाद का विषय रहा है। स्थानीय समुदायों, पारंपरिक संस्थाओं, छात्र संगठनों और विभिन्न नागरिक संगठनों की ओर से लगातार इसका विरोध किया जाता रहा है। विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि यूरेनियम खनन से पर्यावरण, जल स्रोतों और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा खनन परियोजनाओं के कारण जमीन और लोगों के विस्थापन को लेकर भी आशंकाएं जताई जाती रही हैं। मेघालय में यूरेनियम के प्रमुख भंडार दक्षिण-पश्चिम खासी हिल्स क्षेत्र के डोमियासियात, वाहक्यन और आसपास के इलाकों में पाए गए हैं। डोमियासियात क्षेत्र को देश के महत्वपूर्ण बलुआ-पत्थर आधारित यूरेनियम भंडारों में गिना जाता है।
1980 के दशक से जारी है विरोध
मेघालय में यूरेनियम खनन का विरोध नया नहीं है। इसके विरोध की जड़ें 1980 के दशक तक जाती हैं, जब परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (AMD) ने राज्य के यूरेनियम समृद्ध क्षेत्रों में खोज शुरू की थी। बाद में डोमियासियात और किल्लेंग-पिंडेंगसोहियोंग-मावथाबाह क्षेत्र में खनन परियोजना विकसित करने की योजनाएं सामने आईं। भारत सरकार की ओर से पहले डोमियासियात क्षेत्र में Kylleng-Pyndengsohiong-Mawthabah (KPM) Uranium Mining and Milling Project विकसित करने की योजना बनाई गई थी। यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) को परियोजना से जोड़ा गया था। केंद्र सरकार के पुराने दस्तावेजों के अनुसार, परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी सहित कई प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई गई थीं, लेकिन राज्य में स्थानीय विरोध और आवश्यक राज्य स्तरीय स्वीकृतियों के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
छठी अनुसूची और सामुदायिक जमीन का मुद्दा
मुख्यमंत्री संगमा ने विधानसभा में मेघालय की विशिष्ट भूमि व्यवस्था का भी उल्लेख किया। राज्य में संविधान की छठी अनुसूची के तहत समुदाय, कबीले और व्यक्तिगत स्तर पर भूमि स्वामित्व तथा पारंपरिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े किसी भी निर्णय में इस विशिष्ट सामाजिक और संवैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखना जरूरी है।
विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने से पहले 13 अगस्त को मेघालय कैबिनेट ने यूरेनियम खनन के खिलाफ प्रस्ताव के मसौदे को मंजूरी दी थी। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने तब स्पष्ट किया था कि सरकार का रुख राज्य में यूरेनियम खनन या उससे संबंधित किसी भी गतिविधि के खिलाफ है। यह प्रस्ताव विधानसभा के मानसून/शरद सत्र में पेश किया जाना था, जो 24 अगस्त से शुरू हुआ। कैबिनेट के फैसले के बाद संगमा ने कहा था कि केंद्र सरकार से अपील की जाएगी कि मेघालय में यूरेनियम से संबंधित किसी भी प्रकार की खनन या अन्य गतिविधि नहीं की जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद राज्य सरकार अपनी ओर से सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
यूरेनियम भंडार बनाम स्थानीय विरोध
मेघालय का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में पर्याप्त यूरेनियम संसाधन मौजूद होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर खनन को लेकर लंबे समय से विरोध रहा है। केंद्र सरकार के पुराने दस्तावेजों में डोमियासियात क्षेत्र के यूरेनियम संसाधनों को देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण बताया गया था। दूसरी ओर, स्थानीय संगठनों का तर्क रहा है कि आर्थिक लाभ की तुलना में पर्यावरणीय और सामाजिक जोखिम अधिक महत्वपूर्ण हैं। विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद अब राज्य सरकार के सामने इस फैसले को केंद्र के समक्ष औपचारिक रूप से रखने और राज्य में यूरेनियम से संबंधित गतिविधियों को रोकने के लिए आगे की रणनीति तय करने की चुनौती होगी। यह फैसला मेघालय में दशकों से चले आ रहे यूरेनियम विरोधी आंदोलन को विधानसभा का औपचारिक राजनीतिक समर्थन भी प्रदान करता है।