

इंफाल : मणिपुर में लंबे समय से जारी आर्थिक नाकाबंदी को लेकर शनिवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। यूनाइटेड नगा काउंसिल (UNC) ने केंद्र और मणिपुर सरकार के साथ हुई त्रिपक्षीय वार्ता के बाद राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर जारी नाकाबंदी को अस्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है। यह नाकाबंदी करीब 131 दिनों से अलग-अलग रूपों में जारी थी और इससे राज्य में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। यह निर्णय असम के गुवाहाटी स्थित गढ़भंगा में बीएसएफ फ्रंटियर हेडक्वार्टर के ऑफिसर्स मेस में हुई बैठक के बाद लिया गया। करीब तीन घंटे चली इस बैठक में UNC के प्रतिनिधियों के साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय और मणिपुर सरकार के अधिकारी शामिल हुए। वार्ता में नगा संगठन की मांगों के साथ-साथ राज्य की कानून-व्यवस्था और राजमार्गों पर आवागमन बहाल करने के मुद्दे पर चर्चा हुई।
सरकार के आश्वासन के बाद नाकाबंदी हटाने पर सहमति
UNC अध्यक्ष एनजी लोर्हो के अनुसार, बैठक में सरकार की ओर से संगठन की मांगों को आगे की औपचारिक बातचीत में उठाने और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद संगठन ने फिलहाल आर्थिक नाकाबंदी स्थगित करने का फैसला किया। UNC की ओर से कहा गया है कि उसकी प्रमुख मांगों में कुकी सशस्त्र समूहों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते को समाप्त करना, मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को हटाना और मई में मारे गए छह नगा लोगों के मामले में न्याय सुनिश्चित करना शामिल है।
छह नगा लोगों की हत्या के बाद शुरू हुआ था आंदोलन
UNC ने मई में छह नगा नागरिकों के कथित अपहरण और हत्या के बाद आर्थिक नाकाबंदी शुरू की थी। संगठन का आरोप था कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर नगा संगठनों ने राजमार्गों पर आर्थिक गतिविधियों को रोकने का फैसला किया था। बाद में 9 सितंबर से UNC ने नाकाबंदी को और व्यापक करते हुए इसे अनिश्चितकाल के लिए कई राष्ट्रीय राजमार्गों तक बढ़ा दिया था। इसमें NH-2, NH-37, NH-202 और NH-102A शामिल थे। संगठन ने मालवाहक वाहनों की आवाजाही रोकने की घोषणा की थी, जबकि कुछ आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को छूट दी गई थी।
जरूरी सामान की आपूर्ति पर पड़ा असर
लंबी नाकाबंदी का असर मणिपुर की आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ा। इंफाल घाटी सहित राज्य के कई हिस्सों में दवाइयों, ईंधन, बेबी फूड और ताजी सब्जियों जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। कुकी-जो बहुल पहाड़ी जिलों में भी नगा बहुल इलाकों से होकर गुजरने वाले आपूर्ति मार्ग प्रभावित हुए। NH-2 को इंफाल और दीमापुर के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है, जबकि NH-37 इंफाल को जिरीबाम और आगे असम से जोड़ता है। इन मार्गों पर लंबे समय तक व्यवधान से बड़ी संख्या में मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
पहले भी हुई थी राज्य सरकार से बातचीत
नाकाबंदी खत्म करने को लेकर UNC और मणिपुर सरकार के बीच पहले भी बातचीत हुई थी। जुलाई में सेनापति में मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के साथ हुई बातचीत में कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका था। इसके बाद 10 अगस्त को भी सरकार और UNC के बीच वार्ता हुई थी। सरकार ने उस बैठक को सौहार्दपूर्ण और आगे की बातचीत के लिए महत्वपूर्ण शुरुआत बताया था, लेकिन UNC ने अपनी मांगें पूरी होने तक नाकाबंदी जारी रखने की बात कही थी। इसके बाद सितंबर में संगठन ने आंदोलन को और व्यापक कर दिया। शनिवार की बैठक इस लिहाज से महत्वपूर्ण रही क्योंकि इसमें पहली बार केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और UNC के प्रतिनिधि एक साथ बातचीत की मेज पर आए।
आगे की बातचीत पर टिकी रहेगी स्थिति
UNC के नाकाबंदी अस्थायी रूप से हटाने के फैसले से मणिपुर में आवश्यक वस्तुओं और मालवाहक वाहनों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद है। हालांकि, संगठन ने अपनी मूल मांगों को वापस नहीं लिया है। इसलिए राजमार्गों पर सामान्य स्थिति कितने समय तक बनी रहती है, यह आगे होने वाली बातचीत और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों पर निर्भर करेगा। इस बीच मणिपुर में नगा, कुकी-जो और मैतेई समुदायों के बीच जारी तनाव की पृष्ठभूमि में सरकार के लिए राजमार्गों पर निर्बाध आवागमन बहाल करना और विभिन्न समुदायों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान करना महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।