मणिपुर में एनआरसी की मांग को लेकर मशाल जुलूस में हिंसा

पुलिस पर पथराव के बाद आंसू गैस

मणिपुर में एनआरसी की मांग को लेकर मशाल जुलूस में हिंसा
Published on

इंफाल : मणिपुर के काकचिंग जिले में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को अपडेट करने की मांग को लेकर रविवार रात निकाले गए मशाल जुलूस के दौरान हिंसा भड़क गई। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव उस समय बढ़ गया, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने कई आंसू गैस के गोले छोड़े। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, वाबगई, हियांगलाम और आसपास के इलाकों से सैकड़ों ग्रामीण रविवार रात विरोध मार्च में शामिल हुए। करीब तीन किलोमीटर लंबे इस मशाल जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘एनआरसी नहीं तो जनगणना नहीं’ के नारे लगाए। प्रदर्शनकारी जनगणना से पहले एनआरसी को अपडेट करने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) के पुनर्वास से पहले जनगणना नहीं कराई जानी चाहिए।

पुलिस ने कीराक बांध क्षेत्र के पास रोका

प्रदर्शनकारी जब काकचिंग जिला मुख्यालय की ओर आगे बढ़ रहे थे, तो पुलिस ने कीराक बांध क्षेत्र के पास उन्हें रोक दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से वापस लौटने को कहा। अधिकारियों के अनुसार, इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव बढ़ गया। भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और आगे बढ़ने से रोकने के लिए आंसू गैस के कई गोले छोड़े। अधिकारियों ने बताया कि झड़प के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग जनगणना प्रक्रिया से पहले एनआरसी को अद्यतन करने की है।

बड़ी संख्या में विस्थापित हुए हैं लोग

उनका तर्क है कि मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और ऐसे में विस्थापित लोगों के पुनर्वास तथा नागरिकों की स्थिति स्पष्ट किए बिना जनगणना कराने से कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी रही है। इस संघर्ष में 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग अब भी राहत शिविरों या अपने मूल निवास स्थान से बाहर रह रहे हैं। ऐसे में जनगणना और एनआरसी का मुद्दा राज्य में संवेदनशील विषय बना हुआ है। काकचिंग में रविवार रात हुई घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि विस्थापन, नागरिकता और जनगणना से जुड़े मुद्दे मणिपुर में बेहद संवेदनशील हैं। प्रशासन के सामने एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न समुदायों की मांगों और विस्थापित लोगों के पुनर्वास को लेकर भी दबाव बना हुआ है।


Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in