मणिपुर में विस्थापितों के चल संपत्ति नुकसान पर पुनर्वास के बाद विचार करेगी सरकार : गृह मंत्री

अभी तक चल संपत्ति के नुकसान का मुआवजा नहीं
मणिपुर में विस्थापितों के चल संपत्ति नुकसान पर पुनर्वास के बाद विचार करेगी सरकार : गृह मंत्री
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इंफाल : मणिपुर सरकार ने आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) को राहत और पुनर्वास देने की प्रक्रिया के बीच एक अहम बात स्पष्ट की है। राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि विस्थापित लोगों की चल संपत्तियों के नुकसान के मुआवजे पर उनके पुनर्वास और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विचार किया जाएगा।  गृह मंत्री कांग्रेस विधायक के. रंजीत सिंह के सवाल का जवाब दे रहे थे। विधायक ने राज्य में अभूतपूर्व जातीय हिंसा के दौरान विस्थापित हुए लोगों की चल संपत्तियों—जैसे घरेलू सामान और अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं—को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार की योजना के बारे में जानकारी मांगी थी। कोंथौजाम ने विधानसभा को बताया कि सरकार संकट से प्रभावित लोगों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, आईडीपी को उनकी चल संपत्तियों के नुकसान के लिए अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। मुआवजे की संभावित समयसीमा को लेकर पूछे गए पूरक सवाल पर गृह मंत्री ने कहा कि सरकार पहले विस्थापित लोगों के पुनर्स्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करेगी, इसके बाद चल संपत्तियों के नुकसान की भरपाई के मुद्दे पर विचार किया जाएगा।

करीब 60 हजार लोग हुए थे विस्थापित

मणिपुर में 3 मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा ने बड़े पैमाने पर लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर किया। हालिया विधानसभा जानकारी के मुताबिक, संकट के दौरान करीब 60,000 लोग विस्थापित हुए, जिनमें से लगभग 36,000 लोगों का पुनर्वास किया जा चुका है, जबकि करीब 24,000 लोग अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता अब प्रभावित लोगों को सुरक्षित माहौल में उनके मूल स्थानों पर वापस भेजना और जहां तत्काल वापसी संभव नहीं है, वहां पुनर्वास की व्यवस्था करना है। मई 2023 में शुरू हुई हिंसा में मेइती और कुकी समुदायों के बीच व्यापक संघर्ष हुआ। इस दौरान 300 से अधिक लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में परिवार बेघर हुए। कई लोगों को राहत शिविरों में लंबे समय तक रहना पड़ा। विस्थापित परिवारों को घर, जमीन, घरेलू सामान और आजीविका से जुड़े नुकसान का सामना करना पड़ा है। ऐसे में चल संपत्तियों के नुकसान का मुआवजा भी प्रभावित परिवारों की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है।

घर बनाने और संपत्ति नुकसान के लिए केंद्र से सहायता

मणिपुर सरकार के 2026-27 के बजट दस्तावेज के अनुसार, केंद्र सरकार ने पूरी तरह जले 7,000 आईडीपी परिवारों के निजी सामान और चल संपत्तियों के नुकसान के मुआवजे के लिए 70 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को एक लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है। बजट दस्तावेज के मुताबिक इस राशि का 50 प्रतिशत केंद्र द्वारा जारी किया जा चुका है। इसी तरह, विस्थापित परिवारों के स्थायी मकानों के निर्माण और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए भी अलग-अलग वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इससे स्पष्ट है कि चल संपत्ति के नुकसान के लिए केंद्र से स्वीकृत सहायता का प्रावधान मौजूद है, लेकिन विधानसभा में गृह मंत्री के जवाब के अनुसार मुआवजे के वितरण और व्यापक दायरे पर राज्य सरकार पुनर्वास प्रक्रिया के बाद विचार करेगी।

राहत शिविरों से घर वापसी सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने हाल में विधानसभा में बताया था कि सरकार विस्थापित लोगों को सुरक्षित माहौल में उनके घर वापस भेजने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी और घाटी दोनों क्षेत्रों के विस्थापित लोगों की प्राथमिक इच्छा शांति के साथ अपने घर लौटने की है। फरवरी 2026 में राज्य सरकार ने आईडीपी के लिए करीब 33 करोड़ रुपये की सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी थी। सरकार ने इसे विस्थापित परिवारों की घर वापसी और पुनर्वास की दिशा में एक कदम बताया था।  

राष्ट्रपति शासन के बाद लौटी निर्वाचित सरकार

मणिपुर में लगातार जातीय हिंसा और तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। करीब एक साल बाद राष्ट्रपति शासन हटाया गया और वाई. खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद संभाला। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में विस्थापित लोगों की सुरक्षित वापसी, राहत शिविरों को समाप्त करना, क्षतिग्रस्त घरों का पुनर्निर्माण और हिंसा में नष्ट हुई संपत्तियों के नुकसान की भरपाई शामिल है।

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