मणिपुर में 638 करोड़ के सड़क टेंडर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का यथास्थिति आदेश

पहले शिकायत के निपटारे का निर्देश
मणिपुर में 638 करोड़ के सड़क टेंडर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का यथास्थिति आदेश
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इंफाल : मणिपुर में करीब 638 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं के टेंडर को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। मामला सड़क निर्माण के लिए जारी निविदा प्रक्रिया में एक ठेकेदार की आपत्ति से जुड़ा है। न्यायिक कार्यवाही के दौरान परियोजना की समयसीमा और केंद्र से मिलने वाली धनराशि के लैप्स होने की आशंका को भी ध्यान में रखा गया। न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह परियोजना केंद्र प्रायोजित योजना के तहत संचालित हो रही है और इसकी कुल लागत करीब 638 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत है, जबकि मणिपुर सरकार को 10 प्रतिशत राशि का योगदान करना है। अदालत को बताया गया कि परियोजना के लिए उपलब्ध धनराशि के इस्तेमाल की अंतिम समयसीमा 30 सितंबर, 2026 है। समयसीमा के भीतर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने पर धनराशि लैप्स होने की आशंका जताई गई थी। अदालत ने मणिपुर में सड़क निर्माण को सार्वजनिक महत्व की परियोजना माना है।

ठेकेदार की शिकायत पर पहले विचार

विवाद टेंडर प्रक्रिया में शामिल एक पक्ष की शिकायत से संबंधित है। अदालत ने कहा कि वित्तीय बोली यानी टेंडर प्रक्रिया के पार्ट-2 को शिकायत पर विचार किए जाने के बाद ही खोला जाना चाहिए। न्यायिक रिकॉर्ड के मुताबिक, संबंधित ठेकेदार ने 3 सितंबर को अपनी शिकायत प्रस्तुत की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि वित्तीय बोली खोलने से पहले इस शिकायत पर उचित तरीके से विचार किया जाना चाहिए।

सड़क निर्माण को बताया सार्वजनिक महत्व का

अदालत ने अपने आदेश में मणिपुर में सड़क निर्माण परियोजनाओं के महत्व पर भी ध्यान दिया। खासकर राज्य की मौजूदा परिस्थितियों में सड़क संपर्क को महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजना माना गया। अदालत ने कहा कि परियोजना को आगे बढ़ाने में हस्तक्षेप करना सार्वजनिक हित में उचित नहीं होगा। साथ ही, अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिसमें शिकायत के निपटारे से पहले वित्तीय बोली खोलने पर रोक से संबंधित निर्देश दिए गए थे।

अपील खारिज

न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, संबंधित अपील में अदालत ने निचली अदालत के आदेश में कोई त्रुटि नहीं पाई और अपील खारिज कर दी। हालांकि, मुख्य याचिका में उठाए गए अन्य कानूनी सवालों को संबंधित अदालत के समक्ष तय करने के लिए खुला रखा गया है। मामले में सड़क परियोजना की प्रक्रिया, टेंडर में शामिल पक्षों की शिकायत और सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर आगे भी न्यायिक सुनवाई जारी रहने की संभावना है।

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