जरावा जनजातीय समूह को पहली बार निकोबारी मुर्गियां वितरित की गईं

पिछवाड़े मुर्गी पालन से पोषण सुधारने की पहल शुरू
जरावा जनजातीय समूह के लिए वितरित की गई निकोबारी मुर्गियों का दृश्य।
जरावा जनजातीय समूह के लिए वितरित की गई निकोबारी मुर्गियों का दृश्य।
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम - जरावा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के बीच टिकाऊ घरेलू मुर्गी पालन तथा पोषण सहायता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग ने पहली बार 3 सितंबर 2026 को डॉलीगंज स्थित सरकारी कुक्कुट फार्म से जरावा समुदाय के लिए 200 देशी निकोबारी मुर्गियां वितरित कीं।

इन पक्षियों को कदमतला के जनजातीय कल्याण अधिकारी को सौंपा गया, ताकि आगे इन्हें जरावा समुदाय के बीच वितरित किया जा सके। विभाग की ओर से पूरी वितरण प्रक्रिया शत-प्रतिशत अनुदान के तहत की गई है।

निकोबारी मुर्गी का चयन विशेष रूप से इसलिए किया गया है क्योंकि यह अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का देशी कुक्कुट आनुवंशिक संसाधन है और यहां की गर्म तथा आर्द्र जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल है।

मजबूत और सहनशील घरेलू पक्षी होने के कारण इसे अपेक्षाकृत कम संसाधनों में पाला जा सकता है तथा यह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आहार संसाधनों का भी उपयोग कर सकती है। इन मुर्गियों से परिवारों को अंडे और मांस दोनों प्राप्त हो सकते हैं।

इस पहल का उद्देश्य समुदाय के बीच पालतू पशु-पक्षियों को घर में पालने की भावना विकसित करना तथा लोगों को अंडे और मांस के लिए मुर्गियां पालने का प्रशिक्षण और अनुभव प्रदान करना है।

यह प्रारंभिक कार्यक्रम जरावा समुदाय के बीच घरेलू मुर्गी पालन की स्वीकार्यता और स्थानीय परिस्थितियों में पक्षियों की अनुकूलता का आकलन करने में भी सहायता करेगा। साथ ही, ताजे अंडे और मुर्गी के मांस की उपलब्धता के माध्यम से समुदाय के लिए अतिरिक्त पोषण की संभावनाओं का भी पता लगाया जा सकेगा।

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