ब्रिक्स मंच से भारत का संदेश: छोटे किसान, महिलाएं और युवा ही तय करेंगे कृषि का भविष्य

इंदौर में ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक में भारत ने छोटे किसानों, महिलाओं और युवाओं को वैश्विक खाद्य सुरक्षा की कुंजी बताते हुए ‘इंदौर घोषणापत्र’ के जरिए टिकाऊ खेती और किसानों के सशक्तिकरण का साझा रोडमैप सुझाया
बैठक में युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
इंदौर में जुटे ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्री, खाद्य सुरक्षा और खेती में नवाचार पर मंथन।
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इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में ब्रिक्स देशों की अहम बैठक के बीच भारत ने वैश्विक कृषि एजेंडे को नई दिशा देने की पहल की है। खाद्य सुरक्षा, छोटे किसानों की चुनौतियां, खेती में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और युवाओं को कृषि से जोड़ने जैसे मुद्दों पर ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे हैं। भारत की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि भविष्य की खाद्य सुरक्षा का रास्ता छोटे किसानों, महिला शक्ति और तकनीक से लैस युवाओं से होकर गुजरता है।

भारत की अध्यक्षता में शुरू हुई अहम बैठक

ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक का आयोजन इंदौर में किया जा रहा है, जहां सदस्य देशों के प्रतिनिधि कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। बैठक की शुरुआत ‘छोटे किसान, महिलाएं और युवा: खाद्य सुरक्षा का भविष्य’ विषय पर विशेष सत्र के साथ हुई।

बैठक से पहले केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि भारत के लिए यह गर्व का विषय है कि इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता उसके पास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चर्चा के निष्कर्ष वैश्विक कृषि नीतियों को नई दिशा देंगे।

बैठक में युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
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महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि खेती-किसानी में महिलाओं का योगदान सदियों से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन अब जरूरत उनकी भूमिका को और मजबूत बनाने की है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच इस बात पर चर्चा होगी कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं को अधिक अवसर और संसाधन कैसे उपलब्ध कराए जाएं ताकि उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत हो सके।

युवाओं को खेती से जोड़ने की चुनौती

बैठक में युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और डिजिटल समाधान कृषि को युवाओं के लिए आकर्षक बना सकते हैं। उनका मानना है कि यदि युवा खेती से जुड़ेंगे तो उत्पादन बढ़ेगा और दुनिया की खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

छोटे किसानों की समस्याओं पर विशेष फोकस

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय छोटे किसानों की स्थिति को बेहतर बनाना है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत में करीब 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग में आते हैं, जबकि ब्रिक्स देशों में यह आंकड़ा लगभग 70 प्रतिशत है। कम भूमि, सीमित संसाधन और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां इन किसानों के सामने बड़ी बाधा हैं।

उन्होंने कहा कि बैठक में ऐसे उपायों पर चर्चा की जा रही है, जिनसे छोटे किसानों की आय बढ़े, उत्पादन क्षमता मजबूत हो और उनका जीवन स्तर बेहतर बनाया जा सके।

'इंदौर घोषणापत्र' पर टिकी निगाहें

कृषि मंत्रियों की बैठक से पहले ब्रिक्स कृषि कार्य समूह के अधिकारियों की तीन दिवसीय बैठक भी आयोजित की गई थी। इन चर्चाओं के आधार पर शनिवार को ‘इंदौर घोषणापत्र’ जारी किया जाएगा, जिसमें कृषि, खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती और किसानों के सशक्तिकरण से जुड़े साझा संकल्प शामिल होने की संभावना है।

11 देशों का समूह बना वैश्विक ताकत

ब्रिक्स अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है। इसमें Brazil, Russia, India, China, South Africa के साथ Egypt, Ethiopia, Iran, Saudi Arabia, United Arab Emirates और Indonesia भी शामिल हैं। ऐसे में इंदौर में हो रही यह बैठक वैश्विक कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बैठक में युवाओं को कृषि की ओर आकर्षित करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
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