विवाद बढ़ने के बाद IAS अधिकारी ने खाली किया सरकारी कम्युनिटी हॉल

निजी सामान रखने के लिए कर रहे थे इस्तेमाल

विवाद बढ़ने के बाद IAS अधिकारी ने खाली किया सरकारी कम्युनिटी हॉल
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गुवाहाटी : असम-मेघालय कैडर के 2012 बैच के IAS अधिकारी मानवेंद्र प्रताप सिंह ने गुवाहाटी के रेहाबारी स्थित फॉरेस्ट कॉलोनी के सरकारी कम्युनिटी हॉल को खाली कर दिया है। आरोप था कि अधिकारी इस सामुदायिक सुविधा का इस्तेमाल अपने निजी सामान को रखने के लिए कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, सिंह ने 29 सितंबर को हॉल से अपना सामान हटा लिया। इसके बाद कम्युनिटी हॉल को कॉलोनी के अधिकारियों और निवासियों के सामुदायिक इस्तेमाल के लिए फिर से उपलब्ध करा दिया गया है। यह मामला तब सामने आया जब ‘नॉर्थईस्ट नाउ’ ने 8 सितंबर को रिपोर्ट प्रकाशित कर आरोप लगाया था कि सिंह रेहाबारी की फॉरेस्ट कॉलोनी में स्थित कम्युनिटी हॉल का इस्तेमाल निजी सामान रखने के लिए कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, असम वन विभाग की ओर से उन्हें कई बार हॉल खाली करने और वहां रखा सामान हटाने के लिए कहा गया था।

पहले दो सरकारी फ्लैटों को लेकर भी उठा था सवाल

मानवेंद्र प्रताप सिंह वर्तमान में असम परिवहन विभाग में कमिश्नर के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले उन्हें रेहाबारी की फॉरेस्ट कॉलोनी में आवास उपलब्ध कराया गया था। आरोप था कि उन्होंने एक ही परिसर में दो सरकारी फ्लैटों पर कब्जा रखा था। इनमें से एक में वह स्वयं रह रहे थे, जबकि दूसरे फ्लैट का इस्तेमाल निजी सामान रखने के लिए किया जा रहा था। बाद में सिंह को खानापारा स्थित IAS ऑफिसर्स कॉलोनी में एक फ्लैट आवंटित किया गया। इसके बाद उन्होंने रेहाबारी फॉरेस्ट कॉलोनी के दोनों फ्लैट खाली कर दिए। हालांकि, फ्लैट खाली करने के बाद भी कम्युनिटी हॉल में उनका निजी सामान रखा रहा।

दो साल से अधिक समय तक इस्तेमाल का आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी कम्युनिटी हॉल का इस्तेमाल कथित तौर पर दो साल से अधिक समय तक निजी सामान रखने के लिए किया गया। इसके कारण कॉलोनी के अधिकारियों और निवासियों के लिए बनाई गई इस साझा सुविधा तक उनकी पहुंच सीमित हो गई थी। बताया गया है कि असम वन विभाग ने अधिकारी को कई बार पत्र भेजकर कम्युनिटी हॉल से सामान हटाने को कहा था। हालांकि, लंबे समय तक सामान नहीं हटाए जाने को लेकर सवाल उठते रहे। अब सिंह के हॉल खाली करने के बाद वहां रखे निजी सामान को हटा दिया गया है और सामुदायिक सुविधा को फिर से कॉलोनी के लोगों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करा दिया गया है। मामले को लेकर संबंधित अधिकारी की ओर से किसी विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।

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