

नई दिल्ली-असम : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर पूर्वोत्तर राज्यों में बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं (Externally Aided Projects-EAPs) को गति देने की मांग की। बैठक में क्षेत्र में पूंजीगत व्यय बढ़ाने और भौतिक तथा सामाजिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नए निवेश के रास्ते खोलने पर जोर दिया गया। बैठक नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में हुई। दोनों मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों में EAP परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने के साथ-साथ पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर वित्त मंत्री के साथ चर्चा की।
EAP परियोजनाओं को नई गति देने पर जोर
बैठक के बाद हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि दोनों राज्यों में बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं को नई गति देने की जरूरत पर उन्होंने जोरदार तरीके से अपनी बात रखी। उनके अनुसार, इन परियोजनाओं के जरिए भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए निवेश के नए चैनल खोले जा सकते हैं। सरमा ने कहा कि वित्त मंत्री ने प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से नए सिरे से प्रयास का भरोसा दिया।
पूंजीगत व्यय बढ़ाने की रणनीति
मुख्यमंत्रियों और वित्त मंत्री के बीच बातचीत का एक प्रमुख मुद्दा पूर्वोत्तर में कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत व्यय को बढ़ाना रहा। क्षेत्र में सड़क, संपर्क व्यवस्था, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और अन्य सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए बाहरी सहायता वाले प्रोजेक्ट्स को महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। EAP के तहत भारत सरकार को विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB), जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) और अन्य बहुपक्षीय तथा द्विपक्षीय विकास संस्थानों से वित्तीय सहायता और तकनीकी विशेषज्ञता मिलती है। केंद्र सरकार ने जून में भी कहा था कि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए EAP समर्थन 2014 से पहले के करीब 9,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2014 के बाद लगभग 76,000 करोड़ रुपये हो गया है।
मेघालय ने EAP के लिए अतिरिक्त 10 हजार करोड़ की मांग की
बैठक में मेघालय की ओर से EAP के तहत अतिरिक्त आवंटन की मांग भी सामने आई। एक वरिष्ठ राज्य वित्त विभाग के अधिकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने मेघालय के लिए EAP विंडो के तहत अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपये की मांग रखी है। इससे राज्य का कुल EAP आवंटन बढ़कर 15,000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य है। संगमा ने पहले भी कहा है कि मेघालय वर्तमान में विभिन्न क्षेत्रों में 12,466 करोड़ रुपये से अधिक की बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाएं लागू कर रहा है। जून में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मेघालय यात्रा के दौरान भी EAP परियोजनाओं से जुड़े 1,250 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की आधारशिला रखी गई थी।
बुनियादी ढांचे और विकास पर संभावित असर
असम और मेघालय दोनों ही राज्यों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बुनियादी ढांचे के विकास की लागत और परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियां अपेक्षाकृत अधिक हैं। ऐसे में बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं के जरिए लंबी अवधि की बुनियादी ढांचा योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने पर राज्य सरकारें जोर दे रही हैं। EAP परियोजनाएं केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि इनके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक तकनीक और विभिन्न देशों में अपनाए गए विकास मॉडल का लाभ भी मिल सकता है। वित्त मंत्रालय ने भी जून में कहा था कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य कनेक्टिविटी, मानव संसाधन विकास, पर्यटन, आजीविका और टिकाऊ आर्थिक विकास को मजबूत करना है।
केंद्र-राज्य समन्वय पर जोर
बैठक में इस बात पर भी जोर रहा कि परियोजनाओं को समय पर लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। EAP परियोजनाओं में मंजूरी, वित्तीय प्रक्रिया और क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न चरण होते हैं। ऐसे में राज्यों की मांग है कि इन प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाकर परियोजनाओं की गति बढ़ाई जाए।
बैठक में असम भवन की रेजिडेंट कमिश्नर कविता पद्मनाभन और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
पूर्वोत्तर को विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की कोशिश
हिमंत सरमा और कॉनराड संगमा की वित्त मंत्री से मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब केंद्र और पूर्वोत्तर राज्य क्षेत्र में कनेक्टिविटी, निवेश और सामाजिक-आर्थिक विकास को तेज करने पर जोर दे रहे हैं। दोनों राज्यों की ओर से EAP परियोजनाओं को बढ़ावा देने की मांग का उद्देश्य केवल मौजूदा परियोजनाओं को गति देना नहीं, बल्कि भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश के लिए वित्तीय और संस्थागत आधार तैयार करना भी है। इससे सड़क एवं अन्य भौतिक ढांचे के साथ-साथ शिक्षा, पर्यटन, आजीविका और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में भी विकास को गति मिलने की उम्मीद है।