

नयी दिल्ली : मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां मादा चीता ‘ज्वाला’ ने पांच शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो गई है। खास बात यह है कि इनमें से 33 शावक भारत में ही जन्मे हैं, जो प्रोजेक्ट चीता की सफलता का संकेत माना जा रहा है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने इस उपलब्धि को वन्यजीव विशेषज्ञों, पशु चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ की मेहनत का नतीजा बताया है। उनका कहना है कि लगातार निगरानी, बेहतर प्रबंधन और टीमवर्क की वजह से भारत में चीतों का पुनर्वास सफल होता दिख रहा है।
इसी बीच कूनो से जुड़े दो चीतों की गतिविधियों ने भी ध्यान खींचा है। जानकारी के मुताबिक KP-2 और KP-3 नाम के दो चीते कूनो से निकलकर राजस्थान के बारां जिले की तरफ पहुंच गए हैं। इस पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने स्थिति पर नजर रखते हुए जानकारी साझा की है।
अधिकारियों के अनुसार KP-2 बारां जिले के मंगरोल क्षेत्र में ट्रैक किया गया है, जबकि KP-3 करीब 60 से 70 किलोमीटर का सफर तय कर बंज अमली कंजरवेशन रिजर्व तक पहुंच गया है। दोनों चीते फिलहाल पार्वती नदी के अलग-अलग किनारों पर करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद हैं।
वन विभाग की टीमें दोनों चीतों की 24 घंटे जीपीएस और रेडियो कॉलर के जरिए निगरानी कर रही हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान के वन विभाग की संयुक्त टीमें भी इलाके में तैनात हैं, ताकि चीतों की सुरक्षा और गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीतों का इस तरह लंबी दूरी तय करना कोई असामान्य बात नहीं है। जंगली जानवर अक्सर अपना नया इलाका तलाशने के लिए दूर तक घूमते हैं। प्रोजेक्ट चीता की योजना में भी इस तरह के राज्य सीमाओं के पार मूवमेंट की संभावना पहले से शामिल की गई थी।
इन घटनाओं ने कूनो–गांधी सागर वन्यजीव कॉरिडोर की जरूरत को भी फिर से चर्चा में ला दिया है। करीब 17,000 वर्ग किलोमीटर के इस प्रस्तावित कॉरिडोर में राजस्थान के सात और मध्य प्रदेश के आठ जिले शामिल होंगे। इसका मकसद चीतों और अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से बड़े इलाके में घूमने और बसने का मौका देना है।
वन विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और दोनों राज्यों के अधिकारी लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। वहीं कूनो में नए शावकों के जन्म से वन्यजीव संरक्षण की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।